अयोध्या। फैजाबाद बार एसोसिएशन अयोध्या के चार करोड़ से अधिक के बजट को सामान्य सदन में बुधवार को 12 बजे पेश किया गया। इस दौरान कर्मचारियों के वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर पेंच फंस गया। इसे एक मई से लागू करने का निर्णय हुआ है। वहीं, बृहस्पतिवार को भी बजट के मुद्दे पर चर्चा होगी।
बजट के पहले बिंदु में आचार्य नरेंद्र देव सभागार में नई मेज व कुर्सी सहित डायस बनवाने के लिए तीन लाख रुपये के अनुमानित खर्च का बजट पेश किया गया। इस पर सदन में मौजूद सभी अधिवक्ताओं ने सहमति व्यक्त की। अधिवक्ता संघ में होने वाले कार्यक्रम के लिए 200 फाइबर की कुर्सी खरीदने के लिए 1.60 लाख रुपये के अनुमानित व्यय होने का बजट प्रस्तुत किया। अधिवक्ताओं ने ब्रांडेड कुर्सी खरीदने पर सहमति जताते हुए कुर्सी क्रय करने का बजट पास कर दिया।
दोपहर दो बजे फिर से बजट पर चर्चा के लिए बैठक शुरू की गई। इस दौरान अधिवक्ता संघ में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन बढ़ोतरी को लेकर चर्चा शुरू हुई। पूर्व अध्यक्ष संजीव दूबे ने आय-व्यय में काफी अंतर होने का मामला उठाया। कर्मचारी वेतन बढ़ोतरी के लिए अधिवक्ता संघ की नियमावली के अनुसार ही वेतन का भुगतान करने पर महामंत्री शैलेंद्र जायसवाल तैयार हुए।
महामंत्री ने कहा कि संघ की नियमावली में पांच साल बाद कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का प्रावधान दिया गया है। ऐसे में बढ़े हुए वेतन का भुगतान अभी किया जाना संभव नहीं है। सदन में मौजूद अधिवक्ताओं की सहमति से कर्मचारियों के वेतन को एक मई, 2026 से बढ़ाने का निर्णय लिया गया। बजट पर चर्चा बुधवार को पूरी नहीं हो पाई तो अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने बृहस्पतिवार को 11 बजे से सामान्य सदन की बैठक आहूत करने का निर्णय लिया।
इस दौरान पूर्व अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, पूर्व उपाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, सुनील सिंह, पूर्व मंत्री राम शंकर यादव, गिरीश तिवारी, विपिन मिश्रा, पूर्व कोषाध्यक्ष वीरेंद्र मिश्रा, राजकपूर सिंह, विकास श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
संघ विरोधी कार्य करने में तीन अधिवक्ताओं पर जुर्माना
बजट पर चर्चा के लिए अधिवक्ता संघ की ओर से लगातार कई दिन से अधिवक्ताओं को अवगत कराया जाता रहा। बुधवार को दोपहर 12 बजे बजट सामान्य सदन में पेश किया गया। इस दौरान अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार, राजेश व प्रेम बहादुर संघ के प्रस्ताव के विरुद्ध कार्य करते पाए गए। तीनों अधिवक्ताओं पर अधिवक्ता संघ अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, चर्चा के दौरान ही सदन की मर्यादा के खिलाफ कार्य करने वाले अधिवक्ता मनु प्रताप को एक माह के लिए अधिवक्ता संघ की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया।