फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya News: तीस चौबीसी मंडप में प्रतिष्ठित हुईं 720 तीर्थंकर प्रतिमाएं

विज्ञापन
जैन मंदिर में स्थापित की गई 720 तीर्थंकर की प्रतिमाएं। 
विज्ञापन
अयोध्या। रामनगरी के रायगंज स्थित ऋषभदेव दिगंबर जैन मंदिर में आस्था और स्थापत्य का एक अनूठा आयाम जुड़ गया है। यहां निर्मित ‘तीस चौबीसी मंडप’ में जैन परंपरा के 720 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं मंगलवार को विधि-विधान के साथ प्रतिष्ठित की गईं। यह भव्य मंडप जैन धर्म की समृद्ध परंपरा और मूर्तिकला का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है।
विज्ञापन

मंदिर के विशाल परिसर में मुख्य मंडप में भगवान ऋषभदेव की 31 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित है। करीब आठ एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में कई उप-मंडप भी बने हैं, जिनमें चक्रवर्ती भरत सहित भगवान ऋषभदेव के 101 पुत्रों की प्रतिमाएं और भगवान बाहुबली की विशाल मूर्ति भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। अधिकांश मंडप श्वेत संगमरमर से निर्मित हैं, जबकि कुछ लाल बलुआ पत्थर से बनाए गए हैं।
इन्हीं में से एक मंडप ‘तीस चौबीसी’ को समर्पित है, जिसमें जैन परंपरा के अनुसार पांच भरत और पांच ऐरावत क्षेत्रों के भूत, वर्तमान और भविष्य के 24-24 तीर्थंकरों के आधार पर कुल 720 प्रतिमाओं की अवधारणा को साकार किया गया है। नौ रत्नों से निर्मित ये प्रतिमाएं लगभग नौ इंच ऊंची हैं, लेकिन उनकी मुखाकृति और भाव-भंगिमा अत्यंत जीवंत और आकर्षक प्रतीत होती है। इन्हें पांच-पांच फीट ऊंचे और लगभग पांच फीट व्यास वाले 30 सुसज्जित अधिष्ठानों पर स्थापित किया गया है।
विज्ञापन

करीब 60 फीट लंबे, 25 फीट चौड़े और 30 फीट ऊंचे इस मंडप में तीन भव्य शिखर बने हैं, जो इसकी दिव्यता को और बढ़ाते हैं। ध्यानमग्न मुद्रा में स्थापित रत्नों की ये प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराती हैं। जैन मंदिर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रवक्ता विजय कुमार जैन ने बताया कि सभी प्रतिमाओं की स्थापना विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई है। अयोध्या जैसी पवित्र भूमि पर इस प्रकार का मंदिर बनना भारतीय संस्कृति की अमिट धरोहर है।
अयोध्या में हुआ है पांच तीर्थंकरों का जन्म
मंदिर के पीठाधीपति रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि इस अभियान की प्रेरणा जैन समाज की प्रमुख साध्वी ज्ञानमती से मिली। उनके अनुसार यह अद्भुत संयोग तीर्थंकरों की कृपा से ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि 24 जैन तीर्थंकरों में से पांच का जन्म अयोध्या में हुआ था और शेष में से अधिकांश इक्ष्वाकु वंश से जुड़े रहे हैं, जिससे जैन परंपरा और अयोध्या की ऐतिहासिक महत्ता और अधिक उजागर होती है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें