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Ayodhya News: 200 हेक्टेयर कृषि भूमि नदी में समाई, दर्जन भर गांवों में बाढ़ का खतरा

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सोहावल में सरयू पार दत्तनगर में लगी कटान।
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रुदौली/सोहावल। सरयू नदी के जलस्तर पर मामूली गिरावट दर्ज की गई है। सरयू अभी खतरे के निशान से 54 सेमी दूर है। सरयू के जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते तटवर्ती इलाकों में कटान का भी खतरा बढ़ गया है। गोंडा और अयोध्या जनपदों के दर्जनभर से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। सोहावल के मंगलसी, ढ़ेमवा का घरुकन पुरवा, सनाहा, अलीगंज, कलाफरपुर, दत्तनगर, बहादुरपुर और ब्यौदा जैसे गांव प्रभावित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक 200 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
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रविवार की शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92़ 19 मीटर रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान 92़ 73 मीटर से 54 मीटर दूर है। तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि पिछले 24 घंटे में जलस्तर में 16 सेंटीमीटर की कमी आई है। तटवर्ती गांवों में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। तहसीलदार विजय गुप्ता ने बताया कि जलस्तर में कमी आ रही है, फिर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि सभी तटवर्ती क्षेत्रों के लेखपालों और राजस्व कर्मियों को निगरानी के निर्देश दिए हैं। बाढ़ की आशंका वाले गांवों में बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं।
सोहावल प्रतिनिधि के अनुसार, ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत व बचाव कार्य में लापरवाही का आरोप लगाया है। जगन्नाथ, राम समुझ और शीतला यादव जैसे ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन किसी अनहोनी के बाद ही जागता है। तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ समाप्त होने के बाद खेतों की क्षति का आकलन किया जाएगा। 33 फीसदी से अधिक नुकसान होने पर मुआवजे का प्रावधान है। संवेदनशील गांवों में नावों की व्यवस्था भी की गई है।
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इनसेट
बाढ़ से गन्ना, धान और मकई की फसलें बर्बाद
शुजागंज। नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण क्षेत्र के किसानों की कई एकड़ फसलें बर्बाद हो रही हैं। गन्ना, धान और मकई की फसलें विशेष रूप से प्रभावित हुई हैं। पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी भी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। कैथी माझा, महगू का पुरवा सहित कई गांवों में 90 फीसदी खेत बाढ़ प्रभावित हैं। देवीगंज निवासी अनूप सिंह ने बताया कि उनका 15 बीघा गन्ना नदी के जलस्तर बढ़ने से डूब गया। सल्लाहपुर के शोभाराम ने कहा कि उनकी पांच बीघा मकई पानी में डूब गई है।
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