अयोध्या। मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में पिछले करीब सवा माह में डंप किया गया 139 गत्ता सामान चर्चा में है। चीफ फार्मासिस्ट ने पहले तो बगैर ऑर्डर के ही इन सामानों की आपूर्ति का दावा करके बखेड़ा खड़ा कर दिया। इसके 24 घंटे बाद ही वह बैकफुट पर आ गए। हालांकि, बिना ऑर्डर के ही सामान भेजने की आशंका पर चर्चाओं का बाजार गरम है।
प्रयागराज के अल्लापुर की फर्म कुशवाहा आरपी की ओर से पिछले करीब सवा माह में मेडिकल कॉलेज में गत्तों की खेप पहुंचाई गई। 21 जनवरी को एक बॉक्स भेजकर शुरुआत की गई। इसके बाद 11 फरवरी को 28, 16 फरवरी को 30 और 25 फरवरी को एक साथ 80 बॉक्स की आपूर्ति की गई। इसका डिलीवरी चालान तो चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज को उपलब्ध कराया गया, लेकिन साथ में बॉक्स का विवरण, क्रयादेश की कॉपी या बिल इनवॉयस आदि उपलब्ध नहीं कराई गई।
27 फरवरी को चीफ फार्मासिस्ट ने केंद्रीय औषधि भंडार के प्रभारी अधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने पत्र में लिखा कि डिलीवरी चालान के अनुसार प्राप्तकर्ता का नाम चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज अंकित है, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई भी ऑर्डर अपने तरफ से नहीं किया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ तो किसी व्यक्ति के भारी मात्रा में सामान खपाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
मामला तूल पकड़ते ही अगले दिन चीफ फार्मासिस्ट योगेश मिश्रा ने दूसरा पत्र दे दिया। इसमें उन्होंने कहा कि भ्रामक स्थिति उत्पन्न होने के कारण उन्होंने पूर्व में पत्र दिया था, जिसका वर्तमान में महत्व नहीं है। हालांकि, इसमें उन्होंने यह जिक्र नहीं किया कि उन्होंने ऑर्डर किया था या नहीं? ऐसे में दोनों पत्र से चीफ फार्मासिस्ट की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
सवाल है कि उन्होंने आधी-अधूरी जानकारी के साथ पत्र लिखकर बखेड़ा खड़ा किया या किसी के दबाव में दूसरा पत्र लिखकर वह बैकफुट पर आ गए? सामान की आपूर्ति 21 जनवरी से हो रही थी। यदि यह नियम विरुद्ध था तो इतने समय में भी उन्हें इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई?
प्रिंसिपल डॉ. दिनेश सिंह मर्तौलिया ने बताया कि इमरजेंसी के लिए कुछ सामान मंगवाया गया था। बीते दिनों उनके अवकाश पर रहने के दौरान सामानों की आपूर्ति हो गई। इस वजह से चीफ फार्मासिस्ट को भ्रम हो गया था। किसी तरह से गलत सामान की आपूर्ति नहीं हुई है।