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बारिश न होने से सूख रही फसल

Wed, 09 Sep 2015 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया।
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मानसून के रूठने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। सावन में छिटपुट बारिश ही हुई। भादों मास में अभी तक बारिश नहीं हुई और न ही बारिश के आसार दिख रहे हैं। पखवारे से बारिश न होने से फसलें सूखने लगी हैं। खाली खेतों में धूल उड़ रही है। इससे सूखे की आशंका प्रबल हो गई है।
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कई साल से दैवी आपदा से जूझ रहे किसानों को इस साल भी राहत नहीं मिलती दिख रही है। वर्ष 2013-14 में रिकार्ड 1105 मिमी बारिश ने जिले को बाढ़ग्रस्त घोषित कराया था। वर्ष 2014-15 में कमजोर मानसून के चलते जिले में बारिश का आंकड़ा 218.01 मिमी तक ही पहुंच पाया था।


इस बार भी नाममात्र की ही बारिश हुई है। भादों मास के कई दिन गुजर गए, लेकिन दूर-दूर तक बारिश के आसार नहीं दिख रहे हैं। बारिश न होने से जिले में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।
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बारिश न होने से खरीफ की फसलें सूखने लगी हैं। किसी तरह जोड़ जुगाड़ कर किसानों ने खरीफ की फसलों की बुवाई की थी, किंतु बारिश न होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।


‘अमर उजाला’ टीम ने हाइवे स्थित ग्राम जनेतपुर और भाऊपुर गांव का दौरा कर सूखे से प्रभावित हो रही फसलों का जायजा लिया तो स्थिति भयावह दिखाई दी। पानी के अभाव में खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मक्का, ज्वार, उर्द, मूंग, जुंडी की फसलें पीली पड़ गई हैं।

समय पर बारिश न होने से फसल की बुवाई न कर पाने वाले किसानों के जुते खेतों की मिट्टी में दरारें और उड़ती धूल ने खुद ही दास्तां बयां कर दी।

मुरझाई फसलें देख किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। ग्राम चिरहूली, टिकौली, मिहूली, दासपुर, जैतपुर, निगड़ा, गोहना, मड़ैया आदि गांव के भी हालात ऐसे दिखे। अनुमान के मुताबिक सूखे से अब तक किसानों की 30 फीसदी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।




27 मिमी कम हुई बारिश - औरैया। वर्ष 2015 में मौसम वैज्ञानिकों ने कम बारिश होने की संभावना जताई थी। वर्ष 2014 में जिले में 218.01 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। इस साल अब तक 191 मिमी बारिश हुई है, जो पिछले वर्ष से 27 मिमी कम है।


पिछले वर्ष कम बारिश होने से फसलों को तगड़ा नुकसान हुआ थ। पिछले साल औसत बारिश 803 मिमी से 584.99 मिमी कम बारिश हुई। रबी सीजन में बेमौसम बारिश से फसलें नष्ट हो गईं थीं।

 

देर से चेतना प्रशासन की आदत - औरैया। बाढ़ हो या सूखे की स्थिति, प्रशासन को देरी से नजर आती है। सूखे के हालातों में भी कुछ ऐसी स्थित इस बार भी जिला प्रशासन की दिखाई दे रही है।


पिछले साल अगस्त में सूखे को लेकर कृषि विभाग की ओर से सूखे के आंकलन को सर्वेक्षण कार्य शुरू कर दिया गया था। इस बार सितंबर की भी शुरुआत हो गई है, किंतु विभाग की ओर से सर्वे कार्य अब तक नहीं शुरू कराया गया है।

 
जिले में कम बारिश होना चिंता का विषय है। सूखे के हालात बनने शुरू हो गए हैं। जल्द ही सूखे के आंकलन के लिए सर्वे कार्य कराया जाएगा।-  डा. बनारसी यादव, उप कृषि निदेशक।
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