भौतिक संसाधनों में फंसा मनुष्य मोह जाल में जकड़ा रहता है। वह अपने जीवन में सद आचरण को उतार नहीं पाता है, जिससे उसका जीवन अशांति में फंसता चला जाता है। सच्चे सुख और शांति के लिए मनुष्य को इच्छा और लालसा दोनों का त्याग करना होगा। यह बात कथावाचक आचार्य प्रदीप ने भक्तों के बीच कही।
अयाना रोड स्थित संकट मोचन मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान पंडित प्रदीप द्विवेदी ने भक्तों से कहा कि लालसाओं के मोह में जकड़ा व्यक्ति कभी स्थाई शांति नहीं प्राप्त कर सकता है, उनका मन हमेशा भौतिक संसाधनों की ओर भटकता रहता है, उसे लगता है कि यह चीज उसे मिल जाए तो उसकी पूर्ति हो जाएगी।
फिर दूसरी चीज, तीसरी उसकी लालसा बढ़ती जाती है और वह भटकता चला जाता है। कहा कि मन की शांति उसे अपने में ही खोजनी चाहिए, जिससे उसके भटकते मन को शांति मिल सके। उन्होंने कहा कि मन की शांति गुरुओं की शरण व धार्मिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग मात्र करने से मिलती है। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।