फोटो 05 एचएएमपी 18- कुंडौरा-दरियापुर गांव में फाग गाती महिलाएं। स्रोत-ग्रामीण।
- 1970 में कुंडौरा गांव में डकैत ने ग्रामीण की कर दी हत्या
- तब ग्रामीणों ने फाग से बनाई थी दूरी तो महिलाओं ने संभाली कमान
संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआसुमेरपुर। क्षेत्र के कुंडौरा गांव में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ फाग निकाली। उन्होंने ढोलक व मजीरा की थाप पर जमकर नृत्य किया। इस आयोजन से गांव की पुरानी परंपरा को कायम रखा गया।
बुधवार को महिलाओं ने होली गीतों के साथ फाग निकाली। इनमें राधा के हाथ में गड़ुवा सोहे, कृष्ण के हाथ में पिचकारी सखी री जैसे गीत शामिल थे। सास-बहुएं और बेटियां भी इस उत्सव में शामिल हुईं। बृहस्पतिवार को भी सैकड़ों महिलाओं व युवतियों ने फाग निकाली। यह फाग रामजानकी मंदिर से शुरू होकर गांव की गलियों से गुजरी। अंत में खेरापति मंदिर में पहुंचकर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। यहां ब्रज की होली का अद्भुत नजारा देखने को मिला। गांव की प्रधान सविता देवी सहित कई प्रमुख महिलाएं इसमें शामिल थीं।
यह अनूठी परंपरा 1970 में शुरू हुई थी। उस वर्ष कुंडौरा गांव के रामजानकी मंदिर में एक दुखद घटना हुई। डकैत मेंबर सिंह ने गांव के रसपाल पाल की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद गांव के पुरुषों ने फाग न निकालने का निर्णय लिया। तब गांव की महिलाओं ने साहस दिखाते हुए फाग की कमान संभाली।
महिलाओं का योगदान
महिलाओं ने पुरुषों को दरकिनार कर फाग निकालने का बीड़ा उठाया। उनका उद्देश्य रंगों के इस पर्व में कोई व्यवधान न आने देना था। यह परंपरा तब से लेकर आज तक कायम है। प्रधान सविता देवी, कलावती, सुशीला यादव, सुधा, पूर्व प्रधान उपदेश कुमारी, कौशल्या, नीलम और रोहिणी जैसी महिलाएं इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। सैकड़ों महिलाओं व युवतियों ने मिलकर इस उत्सव को जीवंत बनाए रखा है।