पुलिस गुमशुदा बच्चों के प्रति संजीदा नहीं दिख रही है। गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट लिखाने वाले परिजनों को पुलिस की बेरुखी का सामना करना पड़ता है। जैसे-तैसे बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो भी गई तो पुलिस गुमशुदा बच्चों की खोजबीन को खास प्रयास नहीं करती है।
वर्ष 2015 के जनवरी व फरवरी माह की शुरुआत होते ही जिले में बच्चों के गुम होने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है। एक सप्ताह में दो युवक व चार बच्चे लापता हो चुके हैं, जो पुलिस के लिए पहेली बनकर रह गए हैं। बच्चों के इंतजार में उनके परिजन आंसू बहा रहे हैं।
गायब हो रहे बच्चों को लेकर पुलिस गंभीर नहीं है। पिछले दो वर्ष में 36 बच्चे गुम हुए थे। वर्ष 2015 का जनवरी ही बीता था कि बच्चों के गुम होने का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। फरवरी में चार बच्चे घर के बाहर खेलते हुए अचानक गायब हो गए हैं।
गुम हुए बच्चों के परिजन पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराने को जाते हैं तो उन्हें उसकी बेरुखी का सामना करना पड़ता है। यही नहीं उन्हें थाने से बिना रिपोर्ट दर्ज किए टकराने का भी प्रयास किया जाता है। वर्ष 2013 में 17 व 2014 में आठ बच्चे गायब हो चुके हैं। अभी पुलिस इन बच्चों का सुराग नहीं लगा सकी।
ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि आखिर यह गायब बच्चे कहां गए। पुलिस गुमशुदा बच्चों के प्रति कितनी संजीदा है, इसका पता पुलिस रिकार्ड में दर्ज आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पुलिस ने गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन 2013 व 2014 में गायब आठ बच्चों का अभी तक सुराग नहीं लग सका है।
केस:1-दयालपुर निवासी धर्मेश चंद्र दो फरवरी को घर से पांच मिनट में लौटने की बात कहकर घर से चला गया था, लेकिन तब से आज तक उसका कुछ पता नहीं चल सका है। लापता युवक की पत्नी ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई है।
केस:2- ग्राम इंगूठिया निवासी राजेश कुमार का 14 वर्षीय पुत्र अमन दो फरवरी 2015 को गांव से पुर्वा उम्मेद आटा की बोरी उठाने के लिए गया था। देर शाम तक वह घर वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने लोगों से जानकारी ली, लेकिन पुत्र के बारे में कुछ पता नहीं चला। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर इतिश्री समझ ली है।
गुम हुए बच्चों की तलाश लगातार जारी है। किसी प्रकार का सुराग लगते ही उनकी बरामदगी की जाएगी। गुम बच्चों की तलाश किए जाने के लिए टीमाें का गठन कर दिया गया है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।- मनोज तिवारी, एसपी