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औरैयाः सामूहिक बीमा के नाम पर वेतन से काटे गए रुपये, कहां गए

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औरैया। बेसिक शिक्षा विभाग में जिले के करीब 1900 शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों संग छल हुआ है। सामूहिक बीमा के नाम पर 31 मार्च 2014 के बाद नियुक्त शिक्षकों के वेतन से प्रतिमाह 87 रुपये कटते रहे। इस तरह अब तक लाखों रुपये कट गए, पर यह रुपये कहां गए किसी के पास जवाब नहीं है, जबकि एलआईसी ने एक अप्रैल 2014 को यह पॉलिसी ही बंद कर दी थी।
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जिले में 1265 परिषदीय विद्यालय हैं, इनमें करीब पांच हजार शिक्षक तैनात है। अप्रैल 2014 से पहले शिक्षकों का एक लाख रुपये का सामूहिक बीमा किया जाता था। इसके लिए शिक्षकों को प्रतिमाह अपने वेतन से प्रीमियम के तौर पर 87 रुपये देने होते थे। यह धनराशि वेतन के समय ही खाते से कट जाती थी। इस योजना का मकसद था कि कोई दुर्घटना होने पर पॉलिसी होल्डर को क्लेम दिलाया जा सके।
यदि कोई दुर्घटना नहीं होती है तो सेवानिवृत्ति होने के बाद पॉलिसी की पूरी धनराशि मिलती। एलआईसी ने यह योजना 2014 में बंद किए जाने के बाद शिक्षा विभाग से कह दिया था कि एक अप्रैल 2014 के बाद नियुक्त शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
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इसके बाद भी 1900 कर्मचारियों से पॉलिसी का प्रीमियम खाते से कटता रहा। इसको लेकर वर्षों से शिक्षक जानकारी कर रहे थे, पर जिम्मेदारों के पास सही जवाब नहीं था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस तरह लाखों रुपये सरकार के खाते में जमा हो गए हैं, पर इसका लाभ शिक्षकों को नहीं मिलेगा।
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जब पॉलिसी बंद हो गई थी तो प्रीमियम नहीं काटा जाना चाहिए। लाखों रुपये कहां जमा हो गए, किसी के पास जवाब नहीं है। इसके लिए काफी समय से संघर्ष किया जा रहा था। अब शिक्षकों को इसके एवज में लाभ मिलना चाहिए।
यूटा जिलाध्यक्ष ओमजी पोरवाल ने कहा कि सरकार शिक्षकों के साथ कई मायने में भेदभाव कर रही है। पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, ऊपर से सामूहिक बीमा पॉलिसी बंद कर दी गई। इससे मिलने वाला लाभ भी नहीं मिलता है। कटौती की धनराशि ब्याज समेत वापस की जानी चाहिए।
बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन तिवारी ने कहा कि एक सितंबर 2022 को ही वित्त नियंत्रक का पत्र मिला है। जिसमें कहा गया है कि 31 मार्च 2014 के बाद नियुक्त शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों का कट रहा सामूहिक बीमा पॉलिसी का प्रीमियम काटना बंद किया जाए। इसे लेकर लेखाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है।
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