कस्बे में देर रात तक चले कवि सम्मेलन में कवियों ने शब्दों की धारा से कन्या भ्रूण हत्या, आतंकवाद , भ्रष्टाचार व राजनीति पर तीखे प्रहार किए। गीत और गजलों के माध्यम से श्रोताओं को सारी रात बांधे रखा। कवियों की उम्दा रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन भी किया।
गुरुवार रात कस्बा स्थित हृदय वाटिका गेस्ट हाउस में स्व. पंडित हृदय नारायण शुक्ला की पुण्य स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। राधा बल्लभ इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा. बृजनंदन लाल दीक्षित ने कवि सम्मेलन का दीप जलाकर शुभारंभ किया।
हल्द्वानी से आई रचनाकार काजल ने कविता- विधाता भी जिसे पाने की खातिर खूब रोता है.. सृष्टि का प्रारंभ भी जिसके द्वारा होता है, यह गुलशन की महकती खुशबू कहती है कि जहां बेटियां होती हैं, वहीं पर स्वर्ग होता है...सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
लखनऊ के कवि प्रख्यात मिश्रा ने वर्तमान कानून- व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि. अखिलेश आपकी यूपी में सच को जलते हुए देखा है...सुनाकर वाहवाही लूटी।
इटावा से आए कवि गौरव चौहान ने ओजस्वी आवाज में कहा- जो कायरता का पन्ना है, उसे अब फाड़ना होगा, दुश्मन की छाती पर तिरंगा गाड़ना होगा... मैनपुरी से आए कवि जयंत पांडेय ने राजनीति पर कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
कवि प्रबुध तिवारी कानपुरस सतीश मधुप घिरौर, अनीता आनंद इंदौर, डॉ. राजीव राज इटावा ने भी अपनी रचनाएं सुनाकर दर्शकों की तालियां बटोरी।
कार्यक्रम में आयोजक रामजी मिश्रा, आशीष पोरवाल, अनुराग शुक्ला, दया नारायण शुक्ला, पंकज शुक्ला, पूर्व चेयरमैन अनिल कुमार अग्निहोत्री, बेंचेलाल कोरी, मानवेंद्र पोरवाल, रामकुमार अवस्थी, मास्टर सलीम, प्रधानाचार्य कुदरत उल्ला खां, लल्लू ठाकुर, इकबाल चौधरी, अरुण कुमार उर्फ पिंटू मिश्रा आदि उपस्थित रहे।