औरैया। इस बार मार्च के शुरूआती दिनों में ही तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल पर इसका असर दिखने लगा है। गेहूं की फसल समय से पहले ही पकने लगी है।
अचानक बढ़ी गर्मी से बाली में पनप रहा गेहूं का दाना सिकुड़ने लगा है। कमजोर होते दाने से उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही साथ गेहूं के रंग पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखा रही हैं।
मार्च की शुरूआत में ही गर्मी गेहूं की उपज के लिए खतरा बन सकती है। खेतों में अभी गेहूं की फसल पकने की नौबत नहीं आई है, लेकिन पीलापन दौड़ गया है। कच्ची बालियों पर ज्यादा तापमान और तीखी धूप का दबाव गेहूं के दाने को कमजोर कर रहा है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस साल 90000 हेक्टेयर रकबे में गेहूं की फसल उगाई गई है।
अब तक मौसम का चक्र सही चलने से गेहूं की फसल की बढ़वार सही थी, लेकिन होली के बाद तापमान अचानक तेजी से बढ़ गया। अधिकतम तापमान 36 डिग्री के पार जा चुका है। जबकि न्यूनतम 19 डिग्री तक पहुंच गया है।
उधर, दिन में तीखी धूप से लोगों का पसीना छूटने लगा है। सूरज का यह तेवर गेहूं की फसल के लिए भी प्रतिकूल माना जा रहा है। सुबह शाम खेत का रुख कर रहे किसान बाली को देखकर सिकुड़ रहे गेहूं का आकलन कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने पर गेहूं की फसल पर कुछ खास असर नहीं होता है। 15 मार्च तक अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास होना चाहिए, लेकिन इस बार अचानक से तापमान में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आधी अधूरी बाली में भी पीलापन दौड़ रहा है।
अगैती के साथ पिछैती दोनों फसलों पर दिख रहा असर
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार तापमान धीरे-धीरे बढ़ना चाहिए। इससे गेहूं की अगैती और पिछैती फसल का दाना पूरी तरह विकसित हो जाता है। इस बार अचानक तेजी से तापमान बढ़ गया। मौजूदा समय में गेहूं की अगैती फसल में दाना बनना शुरू हो गया है। इसे पकने में समय लगेगा। इसके अलावा पिछैती फसल में दाने के लिए अभी दूध विकसित हुआ है। उसे परिपक्व होने में भी समय लगेगा। इस बीच एकाएक बढ़ा तापमान गेहूं के दाने के इस विकास क्रम को प्रभावित कर रहा है।
तेज धूप से दाने के लिए बना दूध सूख जाएगा। जहां गेहूं का दाना विकसित हो चुका है, वह कमजोर रह जाएगा। दाने को परिपक्व होने के लिए सामान्य तापमान के साथ थोड़ा समय और चाहिए। तेज धूप की जरूरत तब होती है, जब गेहूं की फसल पकने के दिन शुरू हो जाते हैं।
सिंचाई करने की सलाह दे रहे कृषि अधिकारी
तेजी से बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल को प्रभावित होने से बचाने के लिए सिंचाई एक मात्र विकल्प है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि एकाएक बढ़े तापमान से गेहूं के दाने के सिकुड़ने की संभावना है। ऐसे में किसानों को खेत में पर्याप्त नमी रखनी होगी। गर्मी के बीच पौधों को तापमान संतुलित रखने के लिए नमी की जरूरत होगी। सिंचाई के जरिये ही गेहूं की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
उत्पादन गिरने की आशंका
अप्रैल में गेहूं की फसल पकती है, लेकिन इस बार गेहूं में पीलापन अभी से होने लगा है। बाली में गेहूं का पनप रहा बीज सिकुड़ रहा है। उत्पादन गिरने की आशंका है।-सरमन सिंह
घाटा हो सकता है
गेहूं की फसल में अभी बाली पूरी तरह से तैयार नहीं हो सकी है। फसल पकने भी लगी है। गेहूं का दाना सिकुड़ रहा है। ऐसे में रंग और उत्पादन दोनों प्रभावित होने से घाटा हो सकता है।-रामगोपाल
मार्च में ही बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह है। खेत में नमी बरकरार रखते हुए बढ़े हुए तापमान से फसल को बचाया जा सकता है। इसके लिए सिंचाई जरूरी है।-डॉ. रामपलट, मौसम वैज्ञानिक