औरैया। काली मिट्टी कपास की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। जिले के नहर बंबों से सटी तलहटी की जमीनों में काली मिट्टी भी है लेकिन जलनिकासी के अभाव व बारिश से किसान कपास की खेती करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। वहीं, मौसम की दशा भी कपास की खेती में आड़े आती है। यही वजह है कि कपास का रकबा बढ़ नहीं रहा है।
जिले में मुख्य तौर पर धान, गेहूं, सरसों, मक्का, आलू, बाजरा का अच्छा खासा दायरा है। दलहनी फसलों का दायरा पिछले कुछ सालों में घटा है लेकिन कपास की खेती शून्य तक सीमित है। सात अक्तूबर को विश्व कपास दिवस पर किसानों को कपास खेती की बारीकी समझाई जाती है लेकिन जिले में इसे लेकर कुछ खास पहल नहीं होती है चूंकि जिले में कपास खेती को लेकर प्रतिकूल मौसम रहता है। खेतों में काली मिट्टी होने के बावजूद इस खेती के प्रतिकूल मौसम के चलते किसान इस फसल से किनारा करते हैं।
जानकार मानते हैं कि यदि तलहटी के काली मिट्टी वाले खेतों में जलनिकासी दुरुस्त हो तो कुछ हद तक यह खेती हो भी सकती है। जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि काली मिट्टी तो जिले में कुछ हद तक है लेकिन मौसम का साथ कपास की खेती को नहीं मिलता है। जलभराव की वजह से कपास की फसल नष्ट हो जाएगी। ऐसे में जिले में कपास की खेती करने से किसान किनारा करते हैं।
क्या बोले किसान, नहीं दिया जा रहा ध्यान
कपास की खेती के लिए बारिश का संकट
फोटो-06एयूआरपी 17 - भूरेलाल। संवाद
कपास की खेती नया प्रयोग हो सकता है लेकिन अच्छी खासी बारिश कपास की खेती के लिए संकट है। तलहटी के खेतों की मिट्टी काली है लेकिन यहां पर जलभराव की संभावना रहती है।-भूरेलाल
बिक्री के लिए नहीं है बाजार
फोटो-06एयूआरपी 18 -रामनिवास। संवाद
कपास की खेती किसान कर तो सकते हैं लेकिन उत्पादन के बाद इसे बिक्री करने के लिए बाजार भी होना चाहिए। जिले में रुई की खपत खूब होती है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से ही आवक होती है।-रामनिवास
फोटो-06एयूआरपी 17 - भूरेलाल। संवाद