बिधूना। क्षेत्र में गेहूं की बोआई के बाद फसल को पहली सिंचाई की जरूरत है। खेतों में नमी की कमी के चलते फसल पीली पड़ने लगी है।
इसे लेकर सिंचाई विभाग का दावा है कि रविवार रात नहर में पानी छोड़ दिया गया है, एक-दो दिन में माइनरों तक पानी पहुंच जाएगा। क्षेत्र के किसान मनोज कुमार, सुंदीप सिंह, रामवीर, सालिकराम व छोटू सिंह आदि का कहना है कि लगातार बिजली कटौती से सबमर्सिबल से पानी मिलना मुश्किल हो गया है।
महंगाई के दौर में डीजल से सिंचाई करना आर्थिक बोझ बन चुका है। बेला, सहार, बदनपुर, सबहद, कैथावा, नवादा धाधू, वैवाह, चिरूकुआ, हरचंदापुर, कटैया, कुर्सी व रतनपुर रजबहा से अधिकांश किसानों की फसलें सींची जाती हैंं। ऐसे में पानी की देरी उनके लिए बड़ी समस्या बन गई है।
किसानों ने बताया कि जल्द पानी न पहुंचा तो गेहूं की बढ़वार रुकने का खतरा है। कृषि जानकारों के अनुसार गेहूं की बोआई के 18-20 दिन बाद पहला पानी आवश्यक होता है। समय पर पानी न मिलने से फसल की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और आगे की बढ़वार प्रभावित होती है।
रविवार की रात 12 बजे निचली रामगंगा नहर में पानी छोड़ा गया है। यह पानी करीब 23 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए आगे बढ़ रहा है। सोमवार को बिधूना क्षेत्र में पानी पहुंच गया है। अगले एक से दो दिन के भीतर सभी रजबहों और माइनरों में पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा।
-सुरेंद्र कौशल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग कानपुर देहात
फोटो-10- सूखे पड़े क्षेत्र के माइनर। संवाद- फोटो : बहराइच में सुबह के समय छाया कोहरा।