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कोठीपुर और फफूंद रजबहा में पहुंचा पानी

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10 जून के अंक में प्रकाशित खबर। संवाद - फोटो : AURAIYA
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फफूंद। कोठीपुर और फफूंद रजबहा में घसारा नहर से शनिवार सुबह पानी छोड़ दिया गया। दोनों रजबहों से जुड़े कुछ माइनरों में पानी पहुंचने लगा है। अब किसान धान नर्सरी की बोआई के साथ अन्य फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। पिछले एक माह से दोनों रजबहा सूखे पड़े थे। अमर उजाला ने 10 जून के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। इसके बाद सिंचाई विभाग हरकत में आया और अफसरों की फटकार के बाद पानी छोड़ा गया।
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कोठीपुर और फफूंद रजबहों में पानी न आने से नौ माइनर भी सूखे पड़े थे। इससे क्षेत्र की करीब छह हजार हेक्टेयर सिंचित भूमि वाले किसान धान की नर्सरी की बोआई व अन्य फसलों की सिंचाई के लिए परेशान थे। शनिवार को सिंचाई विभाग ने घसारा नहर से कोठीपुर और फफूंद रजबहा में पानी छोड़ा तो किसानों के चेहरे खिले नजर आए।
रजबहा संघ के अध्यक्ष गिरधर भक्त मिश्र समेत कई किसानों ने बताया कि समय से पानी मुहैया कराया गया है। अब किसान आसानी से अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। अध्यक्ष ने बताया कि दोनों रजबहों से नौ माइनरों में पानी जाता है। पानी अभी पूरी क्षमता के साथ नहीं छोड़ा गया है, लेकिन फिर भी इससे काफी राहत मिलेगी।
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अधिशासी अभियंता सिंचाई शिवराज सिंह ने कहा कि रामगंगा कमांड से पांच हजार क्यूसेक पानी की मांग की गई है। फिलहाल जो पानी छोड़ा गया है, उससे रजबहा में पानी भेजा गया है। पूरी क्षमता के साथ पानी आते ही अन्य रजबहों में पानी छोड़ा जाएगा। जिससे किसान समय से फसलों की सिंचाई कर सकें।
इन क्षेत्र के किसानों को मिलेगा पानी
घसारा नहर मुख्य शाखा से निकले 30 किलोमीटर लंबे फफूंद व कोठीपुर रजबहा से मिलने वाले पानी से क्षेत्र की छह हजार हेक्टेयर भूमि की फसलों की सिंचाई की जाती है। फफूंद व कोठीपुर रजबहा से नौ माइनर केशमपुर, नगरिया, सेनपुर, फफूंद दायां, फफूंद बायां, शाह आलमपुर, सिंदुरिया आलमपुर, दौलतपुर, महतेपुर को पानी दिया जाता है। अब फफूंद और कोठीपुर रजबहा में पानी छोड़े जाने से सैकड़ों किसानों को लाभ मिलेगा।
मक्का की सिंचाई और धान नर्सरी के लिए तैयार होंगे खेत
शनिवार सुबह रजबहा में पानी आते ही किसान खेत तक पानी पहुंचाने में जुट गए। किसानों ने बताया कि खेतों में अगेती मक्का की फसल खड़ी है। इसके साथ ही धान बोआई के लिए नर्सरी तैयार की जा रही है। पानी आने से फसलों को काफी फायदा पहुंचेगा। किसान निजी नलकूप की सिंचाई से बचेगा और आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा।

फफूंद रजबहा में छोड़ा गया पानी। संवाद- फोटो : AURAIYA

कोठीपुर रजबहा में बहता पानी। संवाद- फोटो : AURAIYA

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