मरीज देखते डॉ. सौरभ राजपूत। संवाद
बिधूना। मौसम में उतार-चढ़ाव और तेज धूप के चलते वायरल बुखार का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। दिन में उमस-गर्मी और रात में पंखे-कूलर की हल्की ठंडक लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। इस मौसमी बदलाव के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिनमें बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है।
सोमवार को ओपीडी में 441 मरीजों ने पर्चा बनवाया। जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा महज 200 तक सीमित रहता था। वहीं, पैथोलॉजी में जांच के लिए 165 मरीजों के नमूने लिए गए। सीबीसी जांच में 20 मरीजों की प्लेटलेट्स एक लाख या उससे कम (80 हजार, 75 हजार और 95 हजार तक) दर्ज की गईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि डेंगू और मलेरिया की सभी जांच रिपोर्ट निगेटिव आईं। रोजाना 40 से 50 छोटे बच्चे बुखार, सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण के इलाज के लिए सीएचसी पहुंच रहे हैं।
करीब 50 से 60 मरीज ऐसे हैं, जिन्हें एक सप्ताह या उससे अधिक समय से लगातार बुखार बना हुआ है। ओपीडी में उपचार कर रहे डॉ. सौरभ राजपूत व डॉ. नीरज सुमन ने बताया कि सामान्य वायरल बुखार में शरीर के कई पैरामीटर प्रभावित होते हैं, जिससे प्लेटलेट्स घट सकती हैं। इसका मतलब सीधे डेंगू होना नहीं है। वायरल बुखार का असर पांच दिनों तक रहता है, जो दवा और आराम से ठीक हो जाता है। ठंड लगकर बुखार आने पर टाइफाइड जांच कराने की सलाह दी गई है।
वहीं, सीएचसी अधीक्षक डॉ. बीपी शाक्य ने बताया कि प्लेटलेट्स 1.50 लाख से अधिक होनी चाहिए। यदि यह एक लाख से नीचे गिरती है तो डॉक्टरी सलाह अनिवार्य है। मरीजों की सहूलियत के लिए दवा काउंटरों की संख्या दो-दो कर दी गई है ताकि लाइन में इंतजार न करना पड़े।