औरैया। फसलों की पैदावार बढ़ाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कृषि विभाग किसानों को नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के इस्तेमाल के लिए जागरूक कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक यूरिया और डीएपी की तुलना में नैनो उर्वरक न केवल अधिक प्रभावी हैं, बल्कि पर्यावरण और भूमि के लिए भी सुरक्षित हैं।
जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे फसलों में पारंपरिक यूरिया और डीएपी के स्थान पर नैनो यूरिया और नैनो डीएपी तरल (लिक्विड) का प्रयोग करें। यह फसलों के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे लागत में कमी आती है और पैदावार बढ़ती है नैनो उर्वरकों का छिड़काव पत्तियों पर सीधे होने के कारण पौधे इसे तेजी से अवशोषित करते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार होता है। इसके अलावा, नैनो यूरिया की एक बोतल पारंपरिक यूरिया की एक बोरी के बराबर काम करती है, जिससे परिवहन और भंडारण की समस्या से भी मुक्ति मिलती है। विभाग की ओर से जिले के विभिन्न ब्लॉकों में शिविर आयोजित कर किसानों को इसके उपयोग की सही विधि भी बताई जा रही है। कृषि अधिकारी ने बताया कि बीज भंडार केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में नैनो यूरिया व डीएपी उपलब्ध है।