औरैया। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं खुद ही बीमार हैं। जिले की सातों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इस वजह से गर्भवतियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें जांच के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है। 50 शैया अस्पताल में मशीन का संचालन नहीं हो रहा है और 100 शैया में सिर्फ तीन दिन होता है।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का दावा भले ही कर रही हो, पर जिले की हकीकत कुछ और ही है। जिले की आबादी करीब 16 लाख है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दो जिला स्तरीय अस्पताल व सात सीएचसी हैं, पर उनमें स्वास्थ्य सुविधाएं न के बराबर हैं। अजीतमल, बिधूना, दिबियापुर, अयाना, अछल्दा, ऐरवाकटरा, बेला व सहार सीएचसी में पेट से जुड़ी समस्याओं व गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है।
सीएचसी में सुविधा न होने से गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड केे लिए कानपुर, इटावा, कन्नौज व जालौन जाना पड़ता है। निजी पैथोलॉजी में भी लोग अल्ट्रासाउंड के लिए जाते हैं। इसके लिए उनको मोटी रकम भी चुकानी पड़ती है। अयाना सीएचसी में दो दिन पहले प्रसव के दौरान दो महिलाओं के नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। अगर दोनों महिलाओं की अल्ट्रासाउंड समेत अन्य जांचें समयानुसार हुईं होतीं तो उन्हें इलाज मिल सकता था।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में डीएनबी कोर्स के चिकित्सक नहीं है। 100 शैया अस्पताल में सप्ताह के तीन दिन मरीजों का अल्ट्रासाउंड रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जसवंत रत्नाकर करते हैं। 50 शैया में अल्ट्रासाउंड के संचालन के लिए लाइसेंस मिल चुका है, जल्द ही संचालन की व्यवस्था की जाएगी। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन के संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है।
माननीयों के गोद लिए सीएचसी भी बीमार
जिले के ऐरवाकटरा सीएचसी को राज्यसभा सांसद गीता शाक्य और सहार सीएचसी को कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक ने गोद लिया है। दोनों ही माननीयों के सीएचसी में सीबीसी व एक्सरे की सुविधा नहीं है। अल्ट्रासाउंड की बात तो दूर की है। वहीं, दिबियापुर सीएचसी को पूर्व मंत्री लाखन सिंह राजपूत ने गोद लिया था। जब वह मंत्री थे, तब भी दिबियापुर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं करा सके थे।
100 शैया में तीन दिन होता अल्ट्रासाउंड
शहर स्थित 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में मौजूद अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन का लाइसेंस मिल चुका है। इसके बाद भी मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने बताया कि सीएमओ को पत्र लिखकर प्रशिक्षित डॉक्टर व रेडियोलॉजिस्ट की मांग की गई है। दोनों में से किसी एक के आने पर तुरंत अल्ट्रासाउंड शुरू कर दिया जाएगा। चिचौली स्थित 100 युक्त जिला चिकित्सालय में सप्ताह में तीन दिन गुरुवार, शुक्रवार व शनिवार को अल्ट्रासाउंड होता है। बाकी के दिनों में अल्ट्रासाउंड नहीं होने की वजह से मरीजों को परेशानी होती है।
याकूबपुर माधव नगर निवासी नीरज देवी ने बताया कि सहार सीएचसी में वह खून की जांच कराने आई हैं। डॉक्टर ने दो बार अल्ट्रासाउंड भी लिखा, पर दोनों बार निजी पैथोलॉजी में कराना पड़ा। बिधूना के विष्णुपुरवा निवासी रेखा ने बताया कि बिधूना सीएचसी में वह डॉ. स्वस्तिका सिंह को दिखाने आई हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं होने की वजह से कन्नौज कराने जाना पड़ा।
रेखा। संवाद- फोटो : AURAIYA