साल 2015 भी खत्म होने के कगार पर आ गया, लेकिन दो साल भी कस्बे में लोगों को तहसील के तहत होने वाले कामों की सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। लोगों को तहसील के कार्य के लिए सदर मुख्यालय भागना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 14 नवंबर 2013 को अजीतमल कस्बे को तहसील का दर्जा दिया गया था।
सालों की तपस्या के बाद अजीतमल क्षेत्र को 14 नवंबर 2013 को तहसील का दर्जा दिया गया था। लोगों की भागदौड़ कम करने के लिए सपा के कद्दावर नेता शिवपाल यादव अजीतमल को तहसील घोषित कर दिया था। लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी तहसील की सेवाएं पूरी तरह से शुरू नहीं हो सकी हैं।
कई कामों के लिए लोगों को मुख्यालय तक भटकना पड़ता है। तो वहीं स्टाफ की कमी से लोगों को जूझना पड़ रहा है। हालांकि तहसील स्तर के सारे कार्य जैसे भूलेख, संग्रह, आय जाति, नकल खतौनी आदि चालू हो गए है, लेकिन यह सारे कार्य बिजली आने के समय ही हो पाते हैं। तहसील में जनरेटर न होना मुसीबत बना हुआ है तो रजिस्ट्री आदि का कार्य भी औरैया से चल रहा है। ट्रेजरी सिस्टम न होने के कारण अमीनों का वसूली का पैसा आज भी औरैया बैंक में जाकर जमा करना पड़ता है।
तहसील डायट की जगह पर चल रही है। कार्यदायी संस्था की ओर से 3.5 एकड़ भूमि पर बिल्डिंग बनाने का कार्य किया जा रहा है। जुलाई 2016 तक कार्य पूरा हो जाएगा। तब तहसील अपने भवन में पहुंच जाएगी।
- राजेंद्र प्रसाद तिवारी (एसडीएम, अजीतमल)
पूरी तहसील दो लिपिकों के भरोसे चल रही है। बिना स्टाफ के काम करने में बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं 32 लेखपालों के स्थान पर मात्र 19 लेखपाल ही कार्यरत है।
- अरविंद कुमार (तहसीलदार, अजीतमल)
खाली पड़े हैं पद
1-रजिस्ट्रार कानून गो दो पद
2- राजस्व लिपिक
3- राजस्व अहलमद
2- नायब नाजिर
3- सहायक रजिस्ट्रार कानून गो पद दो
4- सहायक वासिल वाकी नवीस
5- स्टेनो
6- अहलमद एक फौजदारी तथा एक राजस्व
7- राजस्व निरीक्षक
8- सम्मन तामील चपरासी पद पांच