फोटो-4- मरीज देखते नेत्र सर्जन डॉ. जयकिशन। संवाद
बिधूना। क्षेत्र में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की रफ्तार सुस्त चल रही है। आवश्यक उपकरणों की कमी से ऑपरेशन देरी से शुरू हो सके, जिस कारण चिह्नित किए गए मरीजों से बहुत कम ऑपरेशन हो पाए हैं।
कुछ मरीज शुगर या अन्य बीमारियों के चलते फिट नहीं पाए गए। ऐसे मरीजों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सर्दी रहने उनका ऑपरेशन हो सके।
बिधूना स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय में आने वाले नेत्र रोगियों का डाटा तैयार किया जाता है। पिछले कुछ समय में अस्पताल आने वाले नेत्र रोगियों की जांच के बाद क्षेत्र के दो सौ मरीजों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया था। इन मरीजों से नवंबर में ऑपरेशन कराने को कहा गया था, पर आवश्यक उपकरणों की कमी से ऑपरेशन देर से शुरू हो पाए।
इससे कुछ मरीजों ने बाहर ऑपरेशन करा लिए तो कुछ शुगर, बीपी या अन्य गंभीर बीमारी के कारण ऑपरेशन के लिए फिट नहीं पाए गए। चिकित्सालय में एक समस्या यह भी है कि यहां सिर्फ एक नेत्र सर्जन हैं। इसलिए सप्ताह में एक ही दिन ऑपरेशन हो पा रहे हैं।
नेत्र सर्जन डॉ. जयकिशन ने बताया कि चिकित्सालय में प्रत्येक बुधवार को मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। ऑपरेशन के लिए मंगलवार को 15 से 17 मरीजों का पंजीकरण होता है।
सीएमएस डॉ. धीरेंद्र सक्सेना और नेत्र सर्जन डॉ. जयकिशन ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद आंख को धूल, धुएं और तेज धूप से बचाना बेहद जरूरी है। डॉ. धीरेंद्र ने बताया कि अब अस्पताल में जो भी मरीज आ रहे हैं, जांच पूरी होने के बाद उनका ऑपरेशन किया जा रहा है। एक अन्य सर्जन की मांग की गई है।