औरैया। जीएसटी चोरी में पकड़े गए आरोपी जरूरतमंदों को रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज लेकर उनके नाम फर्म तैयार करते थे। इसके बाद आरोपी जीएसटी चोरी की घटना को अंजाम देते थे।
शक होने पर विभाग ने जांच की तो फर्म का धरातल में कोई अस्तित्व नहीं मिला। इसके बाद एसआईटी व पुलिस सक्रिय हुई और आरोपियों पर कार्रवाई की गई। पुलिस दो माह में करीब 11 करोड़ की जीएसटी चोरी में आठ आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
सदर कोतवाली पुलिस ने 8.62 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में मेरठ के थाना नौचंदी के मोहल्ला शास्त्री नगर निवासी मोहम्मद अतहर, थाना लिसाड़ी गेट तारापुरी रोड निवासी सीए शाह आलम आलम, थाना सिविल लाइंस के मोहनपुरी निवासी विशाल और थाना किठौर के गांव महलवाला निवासी मोहम्मद इमरान को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आरोपी जरूरतमंद लोगों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज लेते थे। इन दस्तावेजों से फर्जी फर्में तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर सरकार को करोड़ों की चपत लगाते थे। अब तक की जांच में पाया गया है कि आरोपियों ने शहर में करीब 50 से अधिक जगहों पर दुकानें ले रखी थी।
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कीपैड फोन का करते थे प्रयोग
इस फोन का उपयोग ओटीपी के लिए किया जाता है। जीएसटी चोरी करने के बाद आरोपी फर्म बंद करने के साथ मोबाइल नंबर भी बंद कर देते थे। यही नहीं एक फर्म में काम होने के बाद दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर पता बदलकर दूसरी फर्म तैयार करते थे।
पहले पकड़े गए चार आरोपियों में पहाड़िया था मास्टरमाइंड
कोतवाली पुलिस ने 24 फरवरी को करीब दो करोड़ की जीएसटी चोरी में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार जेल गया श्याम सुंदर पासवान जरूरतमंद लोगों को रुपये का लालच देकर उनके दस्तावेज लेता था। वहीं अशोक कुमार पासवान कंप्यूटर पर दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर फर्जी कंपनियां तैयार करने का एक्सपर्ट है।
महावीर शरण उर्फ पहाड़िया बोगस फर्मों के माध्यम से आईटीसी पासऑन करने और राजस्व चोरी का मास्टरमाइंड था। विमल कुमार अपने नाम पर फर्जी फर्म बनवाकर कमीशन और आर्थिक लाभ लेता था। करीब 15 दिन पहले पहाड़िया की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।