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युवक की गला रेतकर हत्या

Fri, 15 May 2015 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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अजीतमल कोतवाली के कस्बा बल्लापुर में दुकान की छत पर सो रहे युवक की गला रेतकर हत्या कर दी गई। मृतक के भाई ने अज्ञात के खिलाफ भाई की हत्या किए जाने की तहरीर दी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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बल्लापुर निवासी सुनील कुमार दुबे (35) पुत्र रामऔतार दुबे की बल्लापुर चौराहे पर मिठाई की दुकान है। गुरुवार को सुनील दुकान बंद कर अपनी दूसरी दुकान की छत पर सोने चला गया। सुबह देर तक सुनील घर नहीं पहुंचा तो परिजनों को शक हुआ।


भाई प्रमोद दुबे ने बताया कि उन्होंने दुकान की छत पर जाकर देखा तो सुनील का रक्त रंजित शव पड़ा था। शव के निकट शराब के पाउच आदि भी पड़े हुए थे। प्रदीप ने घटना की सूचना अजीतमल पुलिस को दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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इधर प्रदीप ने अज्ञात लोगों पर भाई की हत्या का शक जता तहरीर कोतवाली में दी है। अजीतमल कोतवाल केडी यादव ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ तहरीर मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस कार्रवाई कर रही है।



तीन भाइयों की मौत की गुत्थी उलझी...- अटसू (अजीतमल)। सुनील की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। परिवार में यह पहली हत्या नहीं है। परिवार में हुए हादसों पर नजर डाले तो 10 वर्ष पूर्व सुनील के भाई सुबोध की हत्या कर दी गई थी। उस समय भी हत्या की गुत्थी उलझी रही थी।


इसी प्रकार नौ वर्ष पूर्व सुनील के छोटे भाई सुशील दुबे की जहर खाने से मौत हो गई थी। यह जहर सुशील को किसने दिया था अथवा सुशील ने जहर स्वयं खाया था। यह बताने वाला कोई नहीं है। परिवार में हो रही रहस्यमयी मौतों से सभी आहत है।




दहशत में है प्रदीप...- अटसू (औैरैया)। चार भाइयों में तीन भाइयों की मौत से अब प्रदीप दहशत में है। बताते चलें कि रामऔतार दुबे की चार संतानों में तीन सुनील, सुबोध व सुशील की हत्याएं हो चुकी हैं। अब रामऔतार का एक मात्र चिराग प्रदीप बचा है। तीन भाइयों की मौत से प्रदीप भी सहमा हुआ है।



आखिर कौन ले रहा है बदला...- अटसू। रामऔतार के पुत्रों की मौत के पीछे छिपे कारण का पता लगाना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। चार भाइयों में तीन की मौत की गुत्थी सुलझा पाना, पुलिस के लिए आसान नहीं होगा। पुलिस को हत्या का राज जानने को 10 वर्ष पुरानी सुबोध दुबे मर्डर की फाइल खंगालनी होगी।
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पुलिस को पता लगाना होगा कि रामऔतार को वंशविहीन करने से किसे फायदा होगा। कहीं कोई करीबी तो नहीं रामऔतार के परिवार का दुश्मन बन गया है।
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