औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत में अपहरण और दुष्कर्म के मामले में शुक्रवार को सुनवाई की गई।
कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और मुख्य गवाहों के बयानों से पलट जाने से आरोपी राघवेंद्र को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में पीड़िता और उसकी मां समेत मुख्य गवाह अदालत में पक्षद्रोही घोषित हो गए।
मामला करीब 12 साल पुराना है। सदर कोतवाली के एक गांव निवासी महिला ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 15 जनवरी 2014 की रात को उसकी 14 वर्षीय बेटी को राघवेंद्र अपने साथियों के साथ वैन में डालकर अपहरण कर ले गया था। पुलिस ने मामले की विवेचना के बाद आरोपी राघवेंद्र के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बयान दिया कि उसका न अपहरण हुआ न ही दुष्कर्म हुआ। माता-पिता की डांट से नाराज होकर वह खुद अपने मामा के घर आगरा चली गई थी। उसने बताया कि पुलिस के दबाव में आने से धारा 164 के तहत दिए गए बयान दिए थे। वहीं किशोरी की मां भी कोर्ट में अपनी ही तहरीर से मुकर गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखने के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब पीड़िता, उसकी मां और मुख्य तथ्य के साक्षी ही अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं कर रहे हैं तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही शुक्रवार को कोर्ट ने राघवेंद्र को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।