रमजान के पाक माह में गंदगी और दुर्गंध रोजेदारों को गुनाहगार बना रही है। कहते हैं कि आंख, नाक और कान का रोजा भी अपना फर्ज पूरा करता है।
अल्लाह का प्रत्येक बंदा अपने पूरे शरीर को रोजे में लगाए हुए है, लेकिन शहर के सत्तेश्वर मोहाल, जमाल शाह, व खानपुर स्थित मस्जिदों के समीप फैली रोजेदारों के फर्ज में गुनाहगार बन रही है। रोजेदारों ने शहर के पाक रास्तों से गंदगी हटाए जाने की मांग की है।
रमजान का महीना तन, मन, कर्म, धर्म की पवित्रता का महीना है। रमजान के पाक माह में आंखों से बुरा देखना, नाक से दुर्गध सूंघना भी गलत है। ऐसे में रमजानियों के नमाज के रास्ते में फैली गंदगी मुसीबत बन रही है। रमजान से पूर्व गलियों की साफ-सफाई न कराए जाने से रोजेदार परेशान है।
खानपुर के रोजेदार, शब्बीर, सलीम, शमीम कुरैशी, मो. अंसार, आरिफ सिद्दीकी, हामिद ने बताया कि रमजान शुरू होने से पूर्व कुछ सफाई कर्मी आए थे। सड़कों के किनारे पड़ी बड़ी गंदगी उठा ले गए। इसके बाद दोबारा नहीं आए। रमजान के लिए जाते समय गंदगी से बचकर नमाजियों को निकलना पड़ता है।
आरिफ का कहना है कि वह रोजे से हैं। ऐसे में कूड़ा देखना भी गुनाह है, लेकिन क्या करें सफाई नहीं हुई है। बदबू से रोजा भी प्रभावित होता है।
जमाल शाह मोहल्ले के मोहम्मद असलम व साजिद कहते है कि नगर पालिका को रमजान के दिनों में मुस्लिम बस्तियों में विशेष तौर पर सफाई करानी चाहिए, लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। इससे रोजेदारों को परेशानी हो रही है।
सत्तेश्वर मोहाल के बंटू, मोहसिन, सलीन खान का कहना है कि धर्म की पवित्रता का सभी को ध्यान रखना चाहिए। वह अपने कौम के लिए रमजान में अल्लाह से बंदगी करते हैं, लेकिन हमारे ही लोग गंदगी फैला रहे हैं, यह गलत है।