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अपराध की जड़ दबाने में जुटे अफसर

Mon, 07 Dec 2015 11:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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बिजली बिलों में संशोधन के लिए पासवर्ड हैक करने वालों को बचाने के लिए बिजली विभाग के अफसरों ने दिमाग दौड़ाना शुरु कर दिया है। पासवर्ड हैक करने वालों को खोजने के बजाय बिजली बिलों में गलत संशोधन को मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है। ऐसे में पासवर्ड हैक करने वाले अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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बिजली विभाग में एसडीओ या एक्सईएन का पासवर्ड हैक कर बिलों में करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया है। इधर टेरा कंपनी, एसडीओ और एक्सईएन के ऊपर जांच की आंच पहुंचने से पहले ही जांच की दिशा को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। रविवार को एसडीओ ने 18 संदिग्ध लोगों की सूची सीओ को जांच के लिए सौंपी।

लेकिन पासवर्ड हैक करने वालों पर कार्रवाई के लिए कोई जिक्र नहीं किया। इससे जाहिर है कि उच्चाधिकारी सिर्फ बिलों में हेरफेर करने का खुलासा करना चाहते है पासवर्ड हैक करने वालों का नहीं। वहीं पूरे मामले में एक्सईएन ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। मामले में एसडीओ अरविंद सिंह ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
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बिजली विभाग के अधिकारियों ने अधूरी सूची सौंपी है, जिसमें केवल नाम दर्शाए गए हैं। इसके अलावा न तो पता है और न ही विभाग से संबद्धीकरण के कोई दस्तावेज नहीं है। यह सूचना विभाग से मांगी गई है। यह सूचना मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
- सुभाष अत्री (क्षेत्राधिकारी सदर)

साइबर सेल ही खोल सकती है पोल
पासवर्ड हैक कर करोड़ों रुपये का विभाग को चूना लगाने के मामला पूरी तरह से साइबर क्राइम से जुड़ा है। बावजूद इसके बिजली विभाग के अफसर साइबर सेल में जाने से बच रहे हैं। विभाग के सूत्रों की माने तो मामला साइबर सेल में भेज देने से पासवर्ड हैक करने वालों का पता चल जाएगा। इसके साथ ही बिलों में संशोधन की समयावधि में एसडीओ व एक्सईएन में किसकी किससे कितनी देर, कितनी बार और कब बातचीत हुई है। इसके साथ ही पासवर्ड किस समय हैक किया गया। इस दौरान अपराध स्थल पर किसका मोबाइल फोन सक्रिय रहा। साइबर क्राइम में छानबीन के दौरान यह सबकुछ उजागर हो जाएगा।

इंटरनेट के माध्यम से हुई छेड़छाड़ साइबर अपराध में आती है। यदि पासवर्ड हैक कर संशोधन किया गया है तो उसे सबमिट कराने के लिए भेजा भी गया होगा। साइबर क्राइम में मामला दर्ज हो सकता है।
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- शैलेंद्र सिंह रजावत, वरिष्ठ अधिवक्ता
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