चौबीस घंटे के खराब मौसम के बाद शनिवार की रात शुरू हुई बारिश रविवार को पूरे दिन जारी रही। खरीफ फसली चक्र के नुकसान की मार झेल रहे किसानों के चेहरों पर बारिश ने हवाइयां ला दी। बारिश से किसानों की आलू, चना, अरहर, सरसों आदि फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
शनिवार सुबह से ही आसमान में बादल सूर्य को ढके रहे। रात होते होते ही बारिश का सिलसिला शुरू हो गया, जो रविवार को पूरे दिन जारी रहा। औरैया, अजीतमल, अछल्दा, बिधूना, सहार भाग्यनगर और ऐरवाकटरा विकास खंडों में बारिश ने किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। बूंदाबांदी से केवल गेहूं की फसल को फायदा हुआ, जबकि आलू, अरहर और चने की फसल बरबाद हो गई है।
वहीं सरसों की फसलों भी बरबाद होने की संभावना हैं। बारिश से आलू में फंगस तो सरसों की फसल में माहू रोग लगने की संभावना बन गई है। आलू और मटर के किसानों को कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि आलू और मटर की फसल में डाईथेनियम 45 या गंधक और तूतिया का मिश्रण का छिड़काव करें। इससे आलू में फंगस की समस्या समाप्त हो जाएगी। सरसों की फसल को माहू से बचाने के लिए विशेषज्ञों ने किसानों को हफ्ते में दो बार कोई भी कीटनाशक दवा छिड़कने की सलाह दी है।
काश पहले शुरू होती बीमा योजना- औरैया। हाल ही में कृषि मंत्रालय से शुरू की गई फसली बीमा योजना काश और पहले धरातल पर उतारी गई होती तो बारिस और ओलावृष्टि जैसी दैवीय आपदाओं से किसानों के नुकसान की भरपाई हो जाती। योजना का अधूरा क्रियांवयन जिले के किसानों को नुकसान की भरपाई के लाभ से वंचित कर रहा है।
बारिश आलू, अरहर व सरसों किसानों के लिए नुकसानदायक तो है। पर अब तक हुई बारिस से फसलों में कोई खास खराबी नहीं आएगी। घबराएं नहीं, बारिस से फसलों को होने वाले रोगों से बचाने पर समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करते रहें।- डा. बनारसी यादव, उप कृषि निदेशक