साल 1976 ग्राम जसवंतपुर में एक जनसभा को संबोधित करने आई पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने पंचनद में जल की उपलब्धता को देखते हुए यमुना पट्टी के सड़रापुर गांव में बांध बनाने का एलान किया था। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री ने पंचनद बांध इंटरलिंकिंग परियोजना को जमीनी धरातल पर उतारा। कांग्रेस सरकार में भी इस परियोजना को बहुउद्देशीय करार दिया गया था।
केंद्रीय जल बोर्ड के अवर अभियंता विनोद कुमार शर्मा की मानें तो तत्कालीन इंदिरा सरकार में प्रस्तावित पंचनद बांध इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट में 764 मीटर ऊंचाई पर बांध निर्माण भी शामिल किया गया था। इसमें 12 मीटर के 41 बैराज, 40 पियरों में 34 पियरों की मोटाई पांच मीटर तथा छह पियारों में पावर लगाई जाएगी। प्रत्येक पियरों की क्षमता 154 मेगावाट निर्धारित की गई थी।
इस तरह पंचनद क्षेत्र में बांध निर्माण के बाद कुल 410 मिलयन यूनिट बिजली उत्पादन करने की योजना बनाई गई थी। इसके अलावा पंचनद बांध इंटरलिंकिंग परियोजना के तहत दो नहरें निकाले जाने की योजना थी। बांध से निकलने वाले बाएं फीडर की लंबाई 72 किलोमीटर तय की गई थी। जो भोगनीपुर इटावा गंग नहर को औरैया, कानपुर देहात, घाटमपुर, फतेहपुर, बिंदकी और इलाहाबाद जिलों तक की कृषि भूमि को पानी मुहैया कराए जाने का प्रस्ताव था।
जबकि दाएं फीडर से जालौन सहित बुंदेलखंड की बेतवा नहर प्रणाली को पानी दिए जाना तया किया गया था। परियोजना से 4.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र भूमि को सिचाई के लिये पानी उपलब्ध कराए जाने की योजना बनाई गई थी। पंचनद बांध इंटरलिंकिंग में गंग नहर की क्षमता 70 फीसदी से बढ़ाकर 102.4 फीसदी तो बेतवा नहर की क्षमता 65 से बढ़ा कर 85.5 फीसदी किए जाने का भी प्रस्ताव था। परियोजना में 3000 क्यूसेक पानी से बिजली उत्पादन करना भी शामिल किया गया था।
40 साल बाद परियोजना को लगी हवा
मुरादगंज(औरैया)। 40 साल के लंबे अंतराल के बाद मोदी सरकार ने पंचनद बांध इंटरलिंकिंग परियोजना को हवा दी है। शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती और उनके 15 सदस्ययी विशेषज्ञों की टीम का जिले के दौरे को इसी रूप में देखा जा रहा है। उस पर केबिनेट मंत्री उमा भारती के किए जा रहे सर्वेक्षण की अनुकूल रिपोर्ट के साथ सब कुछ केंद्र सरकार की मंशानुसार हुआ था तो बीहड़ का यह प्रोजेक्ट देश का पहला बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट होगा, का बयान से मुरझाई उम्मीदों को हवा दे गया है।