श्री रामलीला कमेटी के तत्वाधान में शहर में बैंडबाजों के साथ भगवान शिव की बारात निकाली गई। इस दौरान बारात में भूत, बेताल, चुडै़ल, शनिचर व राहु के अलावा शंकर जी के विशेष गण रावण खास आकर्षण का केंद्र रहे।
वहीं 14 रथों में सवार देवी- देवताओं की झांकियों ने बारात की रौनक में चार चांद लगा दिए। बारात का शुभारंभ पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डा. कमलेश पाठक ने हरी झंडी दिखाकर किया।
शहर में भगवान शंकर की बारात गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। फूलगंज मैदान से शुरू हुई बारात तहसील चौराहा, महावीरगंज, स्टेट बैंक के बगल वाली गली होते हुए दिबियापुर रोड पहुंची।
इसके बाद बाजार ट्रेजरी होते हुए पुरानी कलेक्ट्रेट फिर सुभाष चौक पहुंची, जहां से कानपुर रोड से होते हुए ब्रह्मनगर मोहल्ले पहुंची, जहां मोहल्ले के लोगों ने बारात का गर्मजोशी से स्वागत किया। बाद इसके शिव बारात रोडवेज बस अड्डा रोड होते हुए जमालशाह फिर बक्सी जी का बाग होते हुए संजय गेट पहुंची।
रास्ते में बारात का जगह-जगह स्वागत किया गया। तत्पश्चात बारात बजरिया होते हुए रूहाई मोहाल पहुंची, जहां पर नगर पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि लालजी शुक्ला ने भगवान शंकर सहित अन्य देवी देवताओं का पूजन कर व मिष्ठान वितरण कर स्वागत किया।
बारात आगे बढ़ते हुए ब्लाक गेट पहुंची, फिर जेसीज चौराहा होते हुए कचहरी रोड मुड़ गई, जहां से बघाकटरा होते हुए वापस तहसील चौराहा पहुंची।
इस बीच कई स्थानों पर लोगों ने शर्बत व मिष्ठान वितरित कर व देवी देवताओं की झांकियों का तिलक कर स्वागत सत्कार किया। बारात पुन: होमगंज बाजार पहुंचकर समाप्त हो गई। इस मौके पर भारी संख्या में लोग बारात में शामिल रहे।
बारात में भगवान शंकर के गण शनिचर, राहु, भूत, बेताल के रूप में सजे कलाकार बारात का विशेष आकर्षण रहे। वहीं बारात में एक अलग ट्रैक्टर पर गर्जना करते चल रहे रावण ने अपने विशेष आदेशों से लोगों को हंसाया।
श्री रामलीला कमेटी के संरक्षक वयोवृद्ध शंकर दयाल शुक्ला, अध्यक्ष आनंद दुबे एडवोकेट, महामंत्री अवधेश मिश्रा ने जनता से 10 अक्तूबर से होमगंज मैदान स्थित रामलीला मंडप में आयोजित रामलीला कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान राम की लीलाओं का आनंद उठाने की अपील की है।
देवी के नौ रूपों से खिली बारात की शोभा- बारात में शामिल 14 रथों में नौ रथों पर देवी के शैल पुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्री, महागौरी व सिद्धीदात्री के रूपों में सजी कन्याएं बारात की शोभा में चार चांद लगा रही थी, जबकि अन्य रथों पर भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान, नारद बारात की रौनक बने हुए थे।