नगर पालिका परिषद कार्यालय। संवाद
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औरैया। शहर में 40 साल बाद स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत सीवर लाइन बनाने की योजना पर कवायद शुरू हो गई है। साढ़े 34 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में शहर की जलनिकासी की समस्या के निदान के लिए नाला बनाए जाने का भी प्रस्ताव भी शामिल है। कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से अगस्त के आखिरी सप्ताह से सर्वे का काम शुरू किए जाने की उम्मीद है।
शहरी क्षेत्र में 1985 के दशक में अंडर ग्रांउड पड़ी सीवर लाइन के चोक होने के बाद से आज तक लोगों को घरों के बाहर टैंक बनाकर और सीधे नाले में मल बहाकर सीवर की समस्या का समाधान करना पड़ रहा है। जिससे नालों में गंदगी भरी रहने से लोगों को सड़ांध का भी सामना करना पड़ता है। वहीं, बारिश व नाले नालियां चोक होने पर सीवर का पानी सड़कों पर बहता है।
शहर के लोगों में सीवर लाइन की जरूरत एक लंबे अर्से से महसूस की जा रही थी। जिस पर शासन से स्वच्छ भारत मिशन अभियोजन के तहत हरी झंडी मिलने के बाद शहर में सीवर लाइन बनाए जाने केे लिए प्रस्ताव तैयार करने और सर्वे का काम कराए जाने के आदेश जारी किए गए। इसके अलावा इसी सर्वे के दौरान शहर की जलनिकासी की समस्या के निदान को बनाए जाने वाले नाले के लिए भी सर्वे किया जाएगा।
जिससे लोगों की दोनों समस्याओं को एक साथ ही समाधान कराया जा सके। इसके लिए कार्यदायी संस्था जल निगम को सर्वे कर पूरी कार्य योजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस काम पर जहां 19 करोड़ से जल निकासी को नाला बनाया जाएगा। वहीं, साढ़े 15 करोड़ रुपये अंडरग्राउंड सीवर पाइप लाइन बिछाने के काम पर खर्च किए जाएंगे। इस नाले को शहर के जलभराव वाले मोहल्लों से होते हुए सीधे यमुना तक पहुंचाया जाएगा।
जल निगम, इटावा के एई डीएस गुप्ता ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शहर की जलनिकासी के लिए बनाए जाने वाले नाले व अंडरग्राउंड सीवर लाइन के बिछाने के काम के लिए अगस्त माह के आखिरी सप्ताह से सर्वे का काम शुरू कराया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के बाद शासन को पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी। जहां शासन से रिपोर्ट पर हरी झंडी मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।
शहर से यमुना तक नाले से जाता सीवरेज का मलयुक्त पानी। संवाद- फोटो : AURAIYA