औरैया। एक एंबुलेंस बुधवार को एक लावारिस बुजुर्ग को लेकर जिला अस्पताल आई थी। उनके बाएं पैर में कीड़े पड़ चुके थे। वह तड़प रहे थे। हालांकि अस्पताल में डॉक्टर ने इलाज के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर किया।
उधर, परिजन न होने की वजह से अस्पताल प्रबंधन ने सदर कोतवाली पुलिस से मदद मांगी। मेमो बनाकर कोतवाली भेजा, लेकिन करीब पांच घंटे बाद भी पुलिस हरकत में नहीं आई। बुजुर्ग मरीज वार्ड में स्ट्रेचर पर तड़पता रहा। अस्पताल प्रबंधन की ओर से 11 बजे से सवा 12 बजे के बीच करीब नौ बार फोन किया गया, मगर नतीजा सिफर ही रहा।
बुधवार सुबह हाईवे किनारे मिहौली ओवरब्रिज के नीचे एक लावारिस वृद्ध को स्थानीय लोगों ने पड़ा देखा। लोगों ने इसकी एंबुलेंस को सूचना दी। वृद्ध के पैर में गहरा घाव था। एंबुलेंस वृद्ध को लेकर सुबह साढ़े नौ बजे के करीब जिला अस्पताल पहुंची। इमरजेंसी में डॉ. प्रियेश ने वृद्ध का उपचार किया।
डॉक्टर ने बुजुर्ग के पैर में कीड़े पाए। डॉक्टर की सलाह पर पैरामेडिकल स्टाफ ने पैर की सफाई कर ड्रेसिंग की। इससे वृद्ध को कुछ हद तक राहत मिली। वृद्ध ने स्टाफ को अपना नाम रामलाल बताया। इसके बाद हालत खराब होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। चूंकि परिजन न होने पर उन्हें ले जाने के लिए पुलिस की जरूरत थी। ऐसे में 10 बजे के करीब डॉक्टर ने मेमो बनाकर सदर कोतवाली भेजा। एक गार्ड की डिमांड की रिसीविंग लेकर स्वास्थ्य कर्मी वापस भी आ गया।
इसके बाद वृद्ध मरीज को इमरजेंसी के बगल में एक वार्ड में स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया। डॉक्टर ने रेफर स्लिप भी तैयार कर दी। इस बीच वृद्ध काफी देर तक तड़पता रहे। बदबू की वजह से लोग वार्ड में जाने से भी कतरा रहे थे।
सीआे को फोन करने के बाद चार बजे के बाद पुलिस वृद्ध को वहां से ले गई। इमरजेंसी में तैनात डॉ. प्रियेश ने बताया कि साढ़े तीन बजे तक भी सदर कोतवाली से कोई भी गार्ड नहीं पहुंचा था। ऐसे में मरीज को हर संभव उपचार किया जाता रहा।
उधर, सदर कोतवाली में मेमो भेजने के साथ ही इमरजेंसी के स्वास्थ्य कर्मी मोबाइल फोन से भी कोतवाली में संपर्क करते रहे। 11 बजे से सवा 12 बजे तक करीब नौ बार कॉल की गई।
मामले में सदर कोतवाली से बात कर रहे हैं। सदर कोतवाली से गार्ड भेजा जाना चाहिए था। देरी क्यों हुई है। इसे पता कर रहे हैं। -अशोक कुमार, सीओ सिटी