फोटो-23एयूआरपी 04 - मां मंगलाकाली मंदिर में पूजा करते भक्त। संवाद
औरैया। शहर से पांच किमी दूर बीहड़ में मां मंगला काली मंदिर सिद्ध शक्ति पीठ में शुमार है। 1857 से पहले ये मंदिर देवकली गांव की कुल देवी का टीला हुआ करता था लेकिन श्रद्धावानों की आस्था इस कदर बढ़ी कि आज यहां पर नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मां के दरबार में दर्शन व पूजा आराधना करने लोग आते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां के दरबार में लगाई गई अरदास पूरी होती है। नवरात्र पर्व पर झंडे व जवारे चढ़ाने औरैया समेत गैर जनपदों से भक्त आते हैं।
यमुना तट से कुछ दूरी पर बीहड़ के ऊंचे टीले पर विराजमान मां मंगला काली शक्ति स्वरूपा हैं। वर्ष 1857 तक मंदिर के आसपास देवकली गांव बसा था। लोग अपनी कुल देवी के रूप में मां की पूजा आराधना करते थे। अंग्रेजों ने सब कुछ नष्ट कर दिया था। लेकिन मंदिर आज भी बना हुआ है। मां की पुरानी मठिया का ही जीर्णोद्धार कर भव्य रूप दिया गया है। इससे मंदिर की लोगों के प्रति आस्था और बढ़ गई। अब यहां पर मां दुर्गा, भैरों बाबा, शिव परिवार व अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
ऊंचाई पर होने के चलते यहां से यमुना नदी और बीहड़ का खूबसूरत नजारा आकर्षण का केंद्र है। भारत प्रेरणा मंच के अविनाश अग्निहोत्री बताते हैं कि देवकली गांव के लोगों की कुल देवी का यहां पर चबूतरा था। 1857 में इस गांव को अंग्रेजों ने तोपों से उड़ा दिया था लेकिन माता का मंदिर इस जद में नहीं आया था। ये मंदिर ही देवकली गांव की याद दिलाता है। मंदिर के पुजारी छुन्ना मिश्रा ने बताया कि नवरात्र पर मातारानी के भक्तों की भीड़ ज्यादा रहती है। देवकली मंदिर आने वाले भक्त मां के दर्शन के लिए अवश्य आते हैं। नवरात्र में पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा चाक-चौबंद की गई है।
श्रद्धालुओं की आस्था
श्रद्धालुओं का मानना है कि मां मंगला काली के दरबार में लगाई जाने वाली हर अरदास मां पूरी करती हैं। श्रद्धालु नवरात्र में मां के दर्शन के लिए आते हैं।
फोटो-23एयूआरपी 04 - मां मंगलाकाली मंदिर में पूजा करते भक्त। संवाद
फोटो-23एयूआरपी 04 - मां मंगलाकाली मंदिर में पूजा करते भक्त। संवाद