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आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने के आरोपियों को नहीं मिली जमानत

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. दीपक स्वरूप सक्सेना ने शुक्रवार को दो याचिकाएं खारिज कर दी। थाना दिबियापुर व औरैया क्षेत्र में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किए जाने संबंधी दो मामलों में जमानत याचिकाएं खारिज हुई।
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जिला शासकीय अधिवक्ता अभिषेक मिश्रा ने बताया कि पहला मामला शहर कोतवाली के बनारसीदास मोहल्ले का है। पांच अप्रैल 2020 को याचिकाकर्ता जमुना देवी के पति हीरेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
उसकी मौत पर पत्नी के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने की धारा 306 का मामला दर्ज हुआ। 26 अप्रैल 2020 से जेल में निरुद्ध जमुना देवी की जमानत याचिका पर जिला एवं सत्र न्यायालय में शुक्रवार को सुनवाई हुई। दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद जिला जज ने जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया।
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उधर, दिबियापुर थाना क्षेत्र के कन्हई का पुर्वा का एक मामला था। इसमें 31 मार्च 2020 को अंजू की हुई मौत पर उसके पति गोपाल को आत्महत्या के लिए दु्ष्प्रेरित किए जाने का आरोपी बनाया गया।
छह अप्रैल 2020 से जेल में निरुद्ध आरोपी गोपाल की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सत्र न्यायालय में बहस हुई। डीजीसी अभिषेक मिश्रा ने जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गोपाल की जमानत याचिका खारिज कर दी।
इसके अलावा शहर के दहेज प्रताड़ना व बलात्कार के आरोपी पति मोहित निवासी समरथपुर औरैया तथा फफूंद क्षेत्र में मारपीट कर कई लोगों को घायल करने के आरोपी रणदीप सिंह निवासी गढिय़ा की जमानत याचिकाएं भी जिला जज डॉ.दीपक स्वरूप सक्सेना ने खारिज कर दी।
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