औरैया। एरवाकटरा थानाक्षेत्र के छिबरामऊ रोड पर अवैध रूप से चल रहे वाहन धुलाई केंद्र दो मासूमों की मौत का कारण बन गए। अगर नौ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो को गंभीरता से लेकर पुलिस जांच और कार्रवाई करती, तो शायद इस हादसे से बचा जा सकता था। वायरल ऑडियो में धुलाई केंद्र संचालक बेखौफ अंदाज में दलाल के बजाय सीधे इंस्पेक्टर साहब को 20 हजार रुपये देकर मामला सेट करने का दावा करता सुनाई दे रहा है। हालांकि, संवाद न्यूज एजेंसी वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करती है।
20 सितंबर को सोशल मीडिया पर 4 मिनट 38 सेकंड का एक ऑडियो वायरल हुआ था। यह बातचीत डंपर चालक और धुलाई केंद्र संचालक के बीच की थी। डंपर चालक ने जब 15 सितंबर को केंद्र बंद रहने की बात कही, तो संचालक ने बताया कि पुलिस ने गाली-गलौज कर केंद्र बंद कराए थे, लेकिन अब मामला सेट हो गया है। उसने जनरेटर से धुलाई के 1200 रुपये और बिजली से एक हजार रुपये रेट तय होने की बात कही। चालक की ओर से रुपये लेने वाले का नाम पूछने पर संचालक ने कहा कि इस बार किसी दलाल के चक्कर में नहीं पड़े, सीधे इंस्पेक्टर साहब से बात हुई है और मामला 20 हजार रुपये में तय हुआ है। बेफिक्र होकर कहा कि अब कभी भी आओ, गाड़ी धुल जाएगी।
ग्रामीणों के अनुसार, एरवाकटरा में नए थानेदार के आते ही इन अवैध केंद्रों को बंद कराया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में ये फिर चालू हो गए। चालकों की सुविधा के लिए संचालकों ने करीब एक बीघा क्षेत्रफल में गहरे गड्ढे खोदकर उनमें पानी भर रखा है। गहराई का अंदाजा न होने के कारण दो मासूम बच्चे इन गड्ढों में समा गए। हादसे के बाद वही पुलिस जांच और छानबीन में जुटी है, जिसने समय रहते कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। एसपी अभिषेक भारती ने बताया कि वायरल ऑडियो की जानकारी हुई है। मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि जालौन, झांसी से आने वाले मौरंग लदे डंपर एरवाकटरा से गुजरते हैं। छिबरामऊ रोड के धुलाई केंद्र पर वाहनों की धुलाई के साथ पानी डालकर मौरंग का वजन बढ़ाने का भी काम होता है। छिबरामऊ रोड पर तीन से चार धुलाई केंद्र हैं। इनके संचालक बड़े-बड़े गड्ढे करने के बाद उसमें पानी भर देते हैं। मोटर के जरिये गड्ढे से पानी निकालकर वाहनों की धुलाई की जाती है। वहां गड्ढे करीब एक बीघा क्षेत्रफल में हैं। इससे वहां बच्चों को गहराई का अंदाजा नहीं लग सका।