औरैया। दिबियापुर में सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी व वन विभाग की जमीनों पर कब्जे हैं। इससे दिबियापुर कस्बे में लगने वाले जाम में फंसकर लोग परेशान रहते हैं।
इसी जाम के खात्मे के लिए कस्बे में नहर किनारे रहने वाले पीडब्ल्यूडी से सेवानिवृत्त कर्मचारी मान सिंह (75) ने जंग छेड़ रखी है। जाम में एंबुलेंस फंसने से अपनी नातिन को खोने वाले मान हाईकोर्ट में पीआईएल के जरिए अकेले ही अभियान चला रहे।
मान सिंह कहते हैं कि उन्होंने अपनी बेटी पायल की शादी इटावा के शीतलपुर गांव से की थी। बेटी के गर्भवती होने पर वर्ष 2014 में वह उसे यह सोचकर दिबियापुर लाए थे कि सीएचसी से नजदीक ही उनका घर है। प्रसव के समय आसानी से अस्पताल पहुंच जाएंगे, लेकिन ऐसा हो न सका।
वह बताते हैं कि उनकी बेटी को अचानक दर्द उठा तो वह एंबुलेंस से अस्पताल के लिए निकले, लेकिन रास्ते में दिबियापुर नहर बाजार में एबुलेंस जाम में फंस गई। करीब दो किलोमीटर का रास्ता तय करने में डेढ़ घंटे लग गए। इससे उनकी बेटी की हालत बिगड़ती चली गई। अस्पताल पहुंचने पर प्रसव के दौरान मृत नातिन हुई।
इस घटना ने उन्हें पूरी तरह से झकझोर दिया। उन्होंने मृत बच्ची को देखकर दिबियापुर कस्बे में जाम की समस्या के खात्मे का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने पहले जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
इसके बाद उन्होंने अतिक्रमण हटवाने की पीआईएल दाखिल की। जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर दिबियापुर को अतिक्रमण मुक्त करने के आदेश दिए थे।
प्रशासन ने जांच कर कोर्ट में जवाब दाखिल किया था और स्वीकारा कि वहां पर अतिक्रमण है। तब से हर साल यहां पर अतिक्रमण हटाने की जुगत चल रही है। कोर्ट की सख्ती पर हर साल सड़कों का दायरा चिह्नित होता है और कब्जेदारों को नोटिसें दी जाती हैं। कुछ पर बुलडोजर भी चलते हैं, लेकिन जाम की समस्या खत्म नहीं होती।
अभियान चला रहे मान सिंह प्रशासन की सुस्ती पर हर साल कोर्ट पहुंचकर मामले की प्रगति जानने का प्रयास करते हैं। इस साल भी वह जून-जुलाई माह में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी देकर जाम से छुटकारे की प्रगति जानने गए थे।
उनका संकल्प है कि जब तक दिबियापुर अतिक्रमण मुक्त नहीं हो जाता। तब तक वह चुप नहीं बैठेंगे। मान सिंह अपने वकील के जरिए कोर्ट में अपना पक्ष रखते हैं।