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जिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, कोहराम

Mon, 11 May 2015 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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फफूंद से प्रसव को जिला अस्पताल पहुंची प्रसूता को चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्रसूता की मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
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रविवार को मदर्स-डे पर शिशु को जन्म देने जा रही नव विवाहिता की मौत हो गई। अमृतपुर निवासी राजेश कुमार की पुत्री रेनू की शादी 18 जून 2014 को फफूंद थाना क्षेत्र के ग्राम केशमपुर निवासी विमल उर्फ कल्लू पुत्र छोटेलाल के साथ हुई थी।


रविवार को रेनू के प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने रेनू को जिला अस्पताल भर्ती कराया। चिकित्सकों ने विवाहिता को मृत घोषित कर दिया।


 
रेनू की मौत से ससुरालीजन आहत हैं। जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत से जननी सुरक्षा योजना की सार्थकता पर सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग रेनू की मौत के कारणों को जानने में लगा हुआ है। इस बाबत क्षेत्र की आशा से पूछताछ की जाएगी।
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मृतका के पिता राजेश ने ससुरालीजनों पर पुत्री रेनू के इलाज में लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया है। फफूंद थानाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल मामले की तहरीर नहीं दी गई है।


 

आखिर कैसे हो रही प्रसूताओं की मानीटरिंग- औरैया। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव कराने का जिम्मा आशाओं को सौंपा गया है। प्रत्येक आशा को गर्भवती महिलाओं की ट्रेसिंग कर उन्हें सरकारी अस्पताल में प्रसव को लाने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। साथ ही प्रसूता की जांच भी नियमित कराने की जिम्मेदारी होती है।



बावजूद उसके जच्चा-बच्चा की मौत सुरक्षित प्रसव पर सवाल खड़े कर रही है। आखिर प्रसव के लिए अस्पताल लाने में देरी क्यों हुई। महिला डाक्टर की रिपोर्ट में प्रसव की तिथि कैसी दर्शाई गई कि प्रसूता की अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हो गई।


 
108 एंबुलेस बन गई मुसीबत- औरैया। रेनू को प्रसव पीड़ा होती देख छोटेलाल ने मोबाइल से कई बार 108 नंबर लगाया। कभी नेटवर्क दगा दे गया, तो कभी पत्नी की पीड़ा ने उसे बेसुध कर दिया। इसी उधेड़बुन में फंसे छोटेलाल की मुसीबत और बढ़ती जा रही थी।



अस्पताल तक पहुंचने को गाड़ी का प्रबंध होता न देख छोटेलाल ने फिर से 108 एंबुलेस पर काल ली। फोन पहले की तरह बिजी जाता रहा। इसके बाद वह पत्नी को लेकर अस्पताल भागा। डाक्टरों ने चेकअप के बाद रेनू को मृत घोषित किया।
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इतना सुनते ही छोटेलाल की चीख निकल पड़ी। छोटेलाल का कहना है कि काश एक बार में एंबुलेस का नंबर मिल जाता तो शायद उसकी पत्नी बच जाती।
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