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Auraiya News: कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश किया निरस्त

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चोरी व मारपीट के एक मामले में परिवाद दाखिल किया गया था
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साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट की अनदेखी करने पर कड़ी टिप्पणी की
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। एफटीसी प्रथम अदालत ने एक फौजदारी निगरानी याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट की अनदेखी करने पर कड़ी टिप्पणी की।

सदर कोतवाली के गांव आनेपुर निवासी योगेश कुमार ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था कि 19 फरवरी 2024 को उसका विवाह ज्योति राजपूत के साथ हुआ था। योगेश के अनुसार, 10 जून 2024 को ज्योति अपने माता-पिता रेखा व रमेश चंद्र, चाचा कल्लू और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ उसके घर आई।
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आरोप है कि इन लोगों ने घर में अलमारी से सोने के जेवर व 70 हजार रुपये चोरी कर लिए। जब योगेश की भाभी सुमन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो आरोपियों ने उनको पीट दिया। घटना के बाद योगेश ने परिवाद दाखिल कर सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
निचली अदालत ने अपने 19 सितंबर 2024 के आदेश में केवल ज्योति राजपूत को तलब किया था। इस आदेश के खिलाफ योगेश ने अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में निगरानी याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने पाया कि निचली अदालत ने परिवादी और साक्षियों के उन बयानों पर गौर नहीं किया जिनमें अन्य आरोपियों की ओर से पीटने की बात कही गई थी।
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न्यायालय ने टिप्पणी की कि किसी भी आदेश का सकारण होना जरूरी है, जबकि इस मामले में धारा 406 के तहत तलब करने के स्पष्ट आधार नहीं बताए गए थे। अपर सत्र न्यायाधीश ने निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया।
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