औरैया। कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज में बनाई गई ईसीआरपी (इमरजेंसी कोविड रिस्पांस प्लान) यूनिट को ठेकेदार अधूरा ही छोड़कर भाग गए।
दो साल बाद बाद भी कार्य पूरा न होने के चलते यहां ताला लटका हुआ। मेडिकल कॉलेज के पहले प्राचार्य ने कार्यदायी संस्था को पत्र भी लिखा, लेकिन यह पत्र भी अब फाइलों में दबकर रह गया है।
वर्ष 2023 में मेडिकल कॉलेज में ईसीआरपी यूनिट की स्थापना के लिए मंजूरी मिली थी। इसका काम भी शुरू हुआ, लेकिन ठेकेदार बीच में ही काम छोड़कर भाग गया। इसके बाद साल 2024 में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अरविंद कुशवाह की ओर से जारी किए गए अंतिम चेतावनी पत्र में फर्रुखाबाद आवास विकास की फर्म एसएस ट्रेडर्स का नाम लिखा गया था।
इसमें ईसीआरपी यूनिट का काम पूरा न किए जाने की बात कही गई थी। पत्र में अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कानपुर मंडल के 20 फरवरी 2024 को जारी हुए पत्र का हवाला दिया गया। वहीं शासनादेश का भी जिक्र किया। इसमें फर्म ने मानक के अनुरूप काम न करते हुए अधूरा छोड़ा जाना बताया गया था।
खास बात तो इस मामले में यह थी कि ईसीआरपी यूनिट का काम अधूरा होने के बाद भी 29 मार्च 2023 को 100 शैया युक्त जिला चिकित्सालय के द्वारा 51.98 लाख का भुगतान फर्म को कर दिया गया था। इस चेतावनी के बाद भी यूनिट के अधूरे कामों को पूरा नहीं किया जा सका है।
यहां पर ताला जड़ा हुआ है। कहीं न कहीं आपात की स्थिति में ईसीआरपी यूनिट का अहम योगदान होता है, लेकिन जिम्मेदारों की नजर यूनिट से हटी हुई है। पूर्व प्राचार्य के पत्राचार कागजों में गुम हो गए हैं। अधिकारी अब इस यूनिट की जानकारी करने की बात कह रहे हैं।
यह काम पड़ा अधूरा
- बेड हैड पैनल के पावर साॅकेट में विद्युत संयोजन नहीं किया गया है।
- सक्शन सिस्टम में विद्युत संयोजन नहीं किया गया है।
- इंटीग्रेटेट हाइब्रिड एचडीयू नर्सिंग स्टेशन की स्थापना का कार्य नहीं कराया गया है।
- एचडीयू व आईसीयू वार्ड में एयर कंडीशनिंग सिस्टम व एयर हैंडलिंग यूनिट की स्थापना नहीं हुई है।
ईसीआरपी यूनिट की उपयोगिता
गंभीर बीमारी खास तौर पर एक-दूसरे को छूने व श्वांस के संपर्क में आने से फैलने वाली बीमारी से पीड़ित मरीजों को ईसीआरपी यूनिट में विशेष सुरक्षित माहौल में रखा जाता है। कोविड काल के दौरान इस यूनिट को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हुई थी। आपात स्थिति में इस यूनिट को अमल में लाया जाता है। 100 शैया जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद भी इस बिल्डिंग की उपयोगिता सिद्ध नहीं हो पा रही है।
ईसीआरपी यूनिट का प्रयोग संक्रामक रोगों को लेकर महत्वपूर्ण होती है। इसमें संक्रामक रोग के मरीजों का उपचार किया जाता है। इस यूनिट के संबंध में पता किया जाएगा। जिला अस्पताल के दौरान इसका निर्माण हुआ था। अभी क्या बचा है, इसका पता लगाया जाएगा।
-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज