बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। बच्चों का अपनी उम्र के हिसाब से कम बढ़ना या वजन में कमी होना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। अगर बच्चों में भूख, वजन में कमी, दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार और रात के समय पसीना आने जैसी समस्या है, तो टीबी हो सकती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एके राय ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है। जो फेफड़ों की टीबी से संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। कुपोषित बच्चे भी जल्दी टीबी का शिकार हो जाते हैं।
बताया कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों में बलगम नहीं बनता है। इस कारण बच्चों में टीबी का पता लगाना मुश्किल होता है। बच्चे की हिस्ट्री और कांटैक्ट ट्रेसिंग के अनुसार ही उसका पेट से सैंपल (गैस्ट्रिक लवाज) के जांच के आधार पर ही टीबी का पता लगाया जाता है।
जिला संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी चौधरी बताते हैं कि बच्चों में टीबी के 60 फीसदी मामले फेफड़ों से जुड़े होते हैं, जबकि बाकी 40 फीसदी अन्य अंगों से जुड़े होते हैं। टीबी के मामलों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है।
डॉ. चौधरी बताते हैं कि नाखून और बाल को छोड़कर टीबी कहीं भी हो सकती है। जो बच्चे कुपोषण, कैंसर, डायबिटीज, एचआईवी या अन्य प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाले रोगों से ग्रसित होते हैं, उनमें टीबी से संक्रमित होने की आशंका सबसे अधिक होती है।