औरैया। मौसम बदलने के साथ ही जिले में बुखार, खांसी और वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। शुरुआती जांच में ढिलाई के कारण अधिकांश को जल्दी आराम नहीं रहा है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आरोप है कि डेंगू, मलेरिया के आंकड़े न बढ़ जाएं इसलिए कुछ चिकित्सक ऐसा कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक मरीज तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और लगातार खांसी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। ये डेंगू या मलेरिया जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं। चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसे मरीजों की पहले दिन ही ब्लड, मलेरिया, डेंगू एंटीजन की जांच कराई जानी चाहिए ताकि बीमारी का समय पर पता चल सके। जिला अस्पताल में अधिकांश मरीजों को पांच दिन की सामान्य दवा देकर वापस भेजा जा रहा है। इस कारण न तो बीमारी की सही पहचान हो पा रही है और न ही मरीजों को जल्दी आराम मिल रहा है। कई मरीज दवा लेने के बाद भी दोबारा अस्पताल लौटने रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार और शरीर दर्द को साधारण वायरल मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। यदि मरीज में प्लेटलेट्स घटने, तेज बदन दर्द या लगातार बुखार जैसे संकेत हों तो शुरुआती टेस्ट जरूरी हैं। देरी होने पर मरीज की स्थिति गंभीर होने का खतरा बढ़ जाता है।
ओपीडी में बढ़ती भीड़ के बीच परीक्षण काउंटरों पर पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कई मरीज परीक्षण न कराकर लौट जाते हैं। कुछ मरीजों ने बताया कि उन्होंने जांच कराने की बात कही लेकिन उन्हें दवा लेकर दोबारा आने की सलाह दे दी गई। इधर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया को तेज करने और संभावित डेंगू, मलेरिया के मरीजों की पहचान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
एक सप्ताह से बुखार आ रहा है। पहले आया तो पांच दिन की दवा दी गई। आराम नहीं मिल रहा इसलिए फिर से आना पड़ा। इस बार जांच लिखी गई है।
दो दिनों से बुखार और बदन दर्द है। जिला अस्पताल में दिखाने आया था। डॉक्टर ने तीन दिन की दवा लिखी है। कहा कि अगर बुखार आता है तो जांच कराएंगे। -सुनील, बनारसी दरवाजा
- लक्षण संदिग्ध लगने पर चिकित्सक द्वारा खून की जांच कराने के लिए लिखा जाता है। अगर कोई चिकित्सक जान बूझकर ऐसा नहीं कर रहा है तो मरीज शिकायत कर सकते हैं। तत्काल जांच कराई जाएगी।
-डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, सीएमएस, जिला चिकित्सालय