बिधूना। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी स्कूलों व अस्पतालों जैसे स्थलों पर आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे मरीजों व स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है। बृहस्पतिवार को क्षेत्र के कई परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की गई तो वहां परिसर में कुत्ते घूमते मिले। वहीं, जिम्मेदार इससे बेखबर नजर आए।
कंपोजिट विद्यालय अलीपुर में रसोईघर के पास कुत्ते लेटे मिले। परिसर में भी आवारा कुत्ते घूमते नजर आए। बच्चों के मिड-डे-मील की रसोई के पास कुत्तों की मौजूदगी गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। इसी तरह बंथरा के कंपोजिट विद्यालय में भी आवारा कुत्ते स्कूल परिसर में घूमते मिले। रसोईघर के बाहर कुत्तों की मौजूदगी से बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में अध्यापकों से बात की गई तो कुछ ने चुप्पी साध ली, जबकि कुछ ने बहाना बनाते हुए कहा कि दीवारें छोटी हैं, इसलिए कुत्ते आ जाते हैं। वहीं कुछ अध्यापकों ने गेट खुला होने से कुत्ते घुस आने का कारण बताया।
अलीपुर स्कूल के प्रधानाचार्य सुनहरी लाल ने कहा कि स्कूल में मेला लगा होने के कारण गेट खुला रहने पर कुत्ता आ गए। सुप्रीम कोर्ट की ओ रसे हाल ही में शिक्षण संस्थानों और अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने साफ कहा था कि स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों का प्रवेश रोकने के लिए चहारदीवारी और गेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद भी व्यवस्था में सुधार की बजाय लापरवाही देखने से अभिभावक भी चिंतित हैं।
बीईओ अल्केश कुमार सकलेचा ने कहा कि कुत्ते स्कूलों में घूम रहे हैं, इसकी जानकारी मिली है। सभी स्कूलों को आज ही निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि किसी भी हाल में कुत्ते स्कूल के अंदर नहीं आने चाहिए। अगर कहीं कुत्ते आ जाते हैं तो उन्हें तुरंत भगाया जाए। स्कूलों के गेट बंद रखें । अगर स्कूल परिसर में कुत्ते दिखाई दिए तो इसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की होगी।
आवारा कुत्तों का आतंक बदस्तूर जारी है। इसका अंदाजा सीएचसी में पहुंचने वाले कुत्ता के काटने से घायल हुए लोगों के जख्म बता रहे हैं। बुधवार को 32 और बृहस्पतिवार को 20 मरीज कुत्ता काटने के वैक्सीन लगवाने पहुंचे। इन 52 मरीजों में 19 पीड़ित ऐसे थे, जिनकी आयु 15 वर्ष से कम थी।