मोदी सरकार के दो साल पूरे हो जाने पर भी जिले में संचालित मृदा उर्वरता योजना प्रारंभिक दौर से आगे नहीं बढ़ पाई है। मृदा उर्वरता योजना के तहत खेतों की मिट्टी की जांच कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जाने का प्रावधान है। स्तरहीन प्रयोगशाला, मिट्टी के नमूनों की बेकदरी तथा लेविल टू की प्रयोगशाला जिले में न होने से मृदा परीक्षण के नाम पर किसानों को छला जा रहा है। केंद्र सरकार की मृदा उर्वरता योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड को लेकर अमर उजाला ने मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की पड़ताल की। जिले में मृदा परीक्षण को लेकर मौजूद संसाधनों और कृषि विभाग की गतिविधियों को दर्शाती ग्राउंड रिपोर्ट।
ऐब से भरी लैब
औरैया। केंद्र की मृदा उर्वरता योजना के तहत मिट्टी का स्वास्थ्य परखने के लिए जिले की बिधूना तहसील स्तर पर मृदा नमूना संग्रह केंद्र के अलावा शहर के उप कृषि निदेशक कार्यालय परिसर में जिला स्तरीय प्रयोगशाला संचालित है। लेविल वन की इस प्रयोगशाला में खेतों की मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटास और फास्फोरस (एनपीके) यौगिक तत्वों की मात्रा परखने की ही सुविधा मौजूद है। डीडी कृषि कार्यालय परिसर में संचालित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का जायजा लेने पर प्रयोगशाला, स्टोर रूम जैसी दिखाई दी।
कबाड़खाने का रूप लिए जिले की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के एक कोने में कागजों के टुकड़ों के ढेर तो दूसरे से तीसरे कोने तक किसानों के खेतों से संग्रहित किए गए मिट्टी के नमूने इधर-उधर फैले दिखाई दिए। प्रयोगशाला के मध्य में पड़ी टेबिलों पर रखे बीकरों और परखनलियों पर धूल-मिट्टी की परत मिली। प्रयोगशाला के एक हिस्से में दो-एक कर्मचारी मिट्टी के नमूनों की प्राप्त रिपोर्ट मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दर्ज करते हुए दिखाई दिए।
यह है बड़ी रुकावट
औरैया। मृदा परीक्षण के क्रम में मिट्टी में आयरन, जिंक, मॉलीवेटिनम, तांबा, कापर, लेड, कार्बन आदि 13 प्रकार के यौगिक तत्वों की जांच के लिए जरूरी लेविल टू की प्रयोगशाला जिले में नहीं है। मिट्टी में उक्त 13 प्रकार के तत्वों की जांच के लिए कृषि विभाग की दूसरे जनपदों पर निर्भरता है। योजना के परवान चढ़ने में सबसे बड़ी रुकावट यही है।
पोल खोलते आंकड़े
साल 2014-15 में जिले में आई मृदा उर्वरता योजना/मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिले को 52242 किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूनों का परीक्षण कर उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाने का लक्ष्य सौंपा गया था। डीएम के दिशा-निर्देशन में इस योजना के लक्ष्य को 2017 में पूरा करना है। लेकिन साल 2015-16 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिले भर में 17456 किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूने जमा किए गए। इनमें जिले की लेविल वन की प्रयोगशाला में 7500 नमूनों की अब तक जांच हो सकी।
9956 नमूने अभी प्रयोगशाला में पड़े हैं। मिट्टी की लेविन वन की जांच के बाद लेविल टू की जांच के लिए 7500 नमूनों को इटावा जिले की प्रयोगशाला में भेजा गया। जहां से 6300 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हो सकी है। 1200 मिट्टी के नमूने इटावा की प्रयोगशाला में पेंडिंग है। साल 2016-17 में कृषि विभाग की ओर से अप्रैल माह से लेकर अब तक 8666 मिट्टी के नमूने लिए जा चुके हैं। इन नमूनों के जांच बाकी है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर लेट-लतीफी की छांव
औरैया। मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद मृदा उर्वरता योजना के तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने में लेट-लतीफी की छाया पड़ती देखी जा रही है। योजना की शुरूआत से लेकर अब कृषि अधिकारी किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने क्रम में चार अंकों का आंकड़ा भी नहीं छू सके हैं।
मृदा उर्वरता योजना के तहत नियमित अंतराल में मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। प्रयोगशाला में नमूनों की जांच का काम जारी है। मिट्टी के नमूनों के लेविल टू की जांच रिपोर्ट देरी से मिल पा रही है।
डा. बनारसी यादव
डीडी कृषि