औरैया। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के बजट में खेलो इंडिया मिशन के लिए बड़ा एलान किया है। इसके अलावा खेलो इंडिया योजना का बजट भी 800 करोड़ से बढ़ाकर एक हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है।
वहीं, जिले कोच के अभाव में यहां खिलाड़ी दूसरे जिलों में पलायन करने को मजबूर हैं, खेल भी दम तोड़ रहे। स्टेडियम के अलावा जिले में एक भी खेल मैदान नहीं है।
जिले का स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर से 50 किलोमीटर दूर बढि़न में बना है। स्टेडियम में खेला इंडिया का केंद्र भी बना है। इसमें तीस खिलाड़ी पंजीकृत हैं, पर कोच सिर्फ क्रिकेट व एथलेटिक्स के ही उपलब्ध हैं। पांच अन्य खेलों के कोचों की नियुक्ति के लिए एक साल से पत्राचार चल रहा है, पर कोच नहीं मिल रहे।
यही कारण है कि हॉकी, बैडमिंटन, फुटबॉल, कबड्डी, बॉक्सिंग जैसे खेलों के खिलाड़ी दूसरे जिलों का रुख कर रहे हैं। स्टेडियम में जो दो कोच हैं, उनकी भूमिका भी इसलिए सीमित है, क्योंकि स्टेडियम दूर होने के कारण शहर, अजीतमल, दिबियापुर आदि जगह के खिलाड़ी वहां जा नहीं पाते।
इसके अलावा जिला युवा कल्याण विभाग द्वारा कंचौसी में एक मिनी स्टेडियम का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें भी कोच कहां से आएंगे, कुछ पता नहीं। इसके अलावा जिले में एक भी खेल का मैदान नहीं है।
कानपुर जाकर ले रहे प्रशिक्षण
जिले के सदर ब्लॉक के भरसेन गांव निवासी आयुषी सेंगर ने सुविधाओं के अभाव में कानपुर का रुख किया। उनकी प्रतिभा को वहां कोचों से तराशा, जिसके बाद वह उप्र की रणजी टीम में चयनित हुईं। वर्तमान में वह छत्रपति शाहूजी महाराज विवि कानपुर की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं। इसी प्रकार जिले के कई खिलाड़ी कानपुर या इटावा में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
कबड्डी खिलाड़ियों की भी वही कहानी
कबड्डी खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में कबड्डी के कोच हैं, न ही दिशा-निर्देश। वे कभी-कभी अभ्यास करने आते हैं और बिना मार्गदर्शन लौट जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनका उत्साह खत्म हो रहा है। जहां एक ओर सरकार खेलो इंडिया के लिए अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
पांच नए खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति के लिए पत्राचार किया जा रहा है। अभी तक कोच मिले नहीं हैं। उम्मीद है कि बजट में खेलो इंडिया का बजट बढ़ने से कोचों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
- संजीव कुमार वर्मा, जिला क्रीड़ा अधिकारी