औरैया। माता-पिता का साया खो चुके बच्चों को सरकारी तंत्र स्पॉन्सरशिप योजना के जरिये पढ़ाई में मदद करता है, लेकिन पिछले नौ माह से यह मदद बच्चों को नहीं मिल रही।
शासन स्तर से इन बच्चों के लिए बजट ही जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इन बच्चों की परवरिश और पढ़ाई पर संकट गहराया है। इन बच्चों के अभिभावक अब विकास भवन के चक्कर लगा रहे हैं।
जिले में बाल सेवा योजना के जरिये माता-पिता को खो चुके बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जाता है। इसमें कोविड काल में साल 2022 में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए ढाई हजार रुपये हर माह मुहैया कराए जा रहे थे। इसमें 1397 बच्चे शामिल हैं। वहीं नाॅन कोविड के लिए भी योजना चलाई गई। इसमें 117 बच्चे शामिल हैं।
कोविड व नॉन कोविड दोनों ही योजना में लाभार्थियों को निरंतर लाभ मिल रहा है, लेकिन स्पॉन्सरशिप योजना में मार्च माह से बजट ही जारी नहीं हुआ है। इस योजना में 271 बच्चे शामिल हैं। इन्हें 18 साल की आयु तक चार हजार रुपये प्रति माह दिए जाने हैं। इस मदद से बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया जाता है।
चाचा-चाची व अन्य रिश्तेदारों के सरंक्षण में रह रहे इन बच्चों की पढ़ाई अब भगवान भरोसे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार स्पॉन्सरशिप योजना को अब ऑनलाइन किया जा रहा है। इसमें अब सीधे लाभार्थी के खाते में डीबीटी के तहत पैसा भिजवाया जाएगा। ऐसे में खातों की फीडिंग चल रही है। आवेदनों को ऑनलाइन किया गया है। (संवाद)
नौ माह से नहीं मिली मदद
केस एक : सत्तेश्वर मोहल्ला निवासी रागिनी देवी ने बताया कि भतीजे को मिलने वाली सरकारी मदद पिछले नौ माह से नहीं मिली है। स्कूल की फीस जमा करने में दिक्कत आ रही है। आगामी दिनों में बोर्ड परीक्षा है। ऐसे में स्कूल की ओर से लगातार फीस जमा करने के लिए कहा जा रहा है।
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फीस का जुगाड़ मुश्किल
केस दो : गांव सेहुद निवासी राजेश कुमार ने बताया कि भाई का देहांत हो जाने के बाद से भाभी व भतीजा अभिनव उनके साथ रह रहा है। भतीजे को स्पॉन्सरशिप योजना से हर माह मिलने वाले चार हजार रुपये भी बंद है। ऐसे में फीस के लिए जुगाड़ करना पड़ रही है। योजना का लाभ समय से मिलता तो कोई दिक्कत नहीं आती है।
स्पॉन्सरशिप योजना के लिए मार्च माह से बजट नहीं आया है। अब इस योजना में डीबीटी के तहत लाभ देने के लिए ऑनलाइन फीडिंग कराई जा रही है। बजट आने के पर पात्रों को लाभ दिया जाएगा। जो अभिभावक समस्या लेकर आ रहे हैं। उन्हें जानकारी दी जा रही है।
-रीना चौहान, बाल संरक्षण अधिकारी