बजट के अभाव में अधूरी पड़ी पानी की टंकी।
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केंद्र व प्रदेश सरकार से लागू जिला पेयजल पुनर्गठन योजना में उपभोग प्रमाण पत्र भेजने के एक साल बीतने के बाद भी आज तक दूसरी किस्त जारी नहीं की गई है। इससे पूरी योजना अधर में लटकी हुई है। धनराशि न आने से योजना के तहत निर्माणाधीन छह पानी की टंकियां व 17 ट्यूबवेल शोपीस बनकर रह गए हैं। हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक एक माह पहले दूसरी किस्त की धनराशि केंद्र से प्रदेश को जारी की जा चुकी है। प्रदेश सरकार से किश्त जारी होने में लेटलतीफी हो रही है।
शहर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लागू जिला पेयजल पुनर्गठन योजना के पूरा होने में बजट जारी न होना रोड़ा बना हुआ है। बता दें कि योजना के लिए जारी प्रथम किस्त को नगर पालिका के माध्यम से कार्यदायी संस्था जल निगम को जारी किया गया था। इस बावत जल निगम की ओर से उक्त जारी 20 करोड़ रुपये की प्रथम किस्त के उपभोग का प्रमाण पत्र भी शासन को एक साल पहले ही भेज दिया गया था लेकिन केंद्र सरकार से दूसरी किस्त की धनराशि जारी न किए जाने से पूरा मामला अधर में पड़ा हुआ था।
वहीं प्रदेश सरकार ने भी योजना में निर्धारित अपने हिस्से की धनराशि जारी नहीं की। इससे एक साल से पूरा काम ठप पड़ा हुआ है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक लगभग दो माह पहले केंद्र ने तो अपने हिस्से की धनराशि प्रदेश सरकार को जारी कर दी थी लेकिन अब यह धनराशि प्रदेश सरकार में आकर उलझी पड़ी है। इस कारण से शहर में छह जगह बनाई गई पानी की टंकियों व 17 ट्यूबवेल यथावत स्थिति में पड़े हुए हैं। टंकियों की स्थिति देखे तो इनमें से चार टंकियां का निर्माण कार्य तो पूरा हो गया लेकिन उनमें रंग रोगन व ट्यूबवेल में मशीन की कमी के कारण ट्यूबवेल से जोड़ी नहीं जा सकी हैं।
वहीं दो टंकियाें में अभी तक पाइप लाइन ही नहीं जोड़ी जा सकी हैं। यही स्थित ट्यूबवेलों की है। इनमें आधे से अधिक ट्यूबवेलों में मोटर ही नहीं डाली जा सकी हैं। वहीं जिनमें मोटर पड़ी हैं उनमें बिजली कनेक्शन नहीं हैं। ऐसे में पूरी की पूरी योजना खटाई में पड़ी हुई है।
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विभाग की ओर से लगातार प्रयास जारी हैं। अभी किस्त को जारी होने में लगभग एक माह का समय और लग सकता है। जैसे ही बजट मिलेगा। काम शुरू करा दिया जाएगा।
देवेंद्र सिंह
अधिशाषी अभियंता, जल निगम