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छह जीआईसी एक टीचर के भरोसे

Sun, 01 May 2016 12:09 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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education - फोटो : getty images
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जिले के कुल 15 राजकीय इंटर कॉलेज में छह कॉलेज एक टीचर के भरोसे चल रहे हैं। सृजित पदों के सापेक्ष महज 40 फीसदी टीचर ही कॉलेज में उपलब्ध हैं। ऐसे में एक टीचर बच्चों को कई-कई विषय पढ़ाने को मजबूर हैं।
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कहने को तो जिले में 15 राजकीय विद्यालय संचालित हैं, लेकिन शायद ही कोई ऐसा विद्यालय होगा जो टीचरों का कोरम पूरा कर रहा हो। दो-तीन राजकीय विद्यालयों को छोड़ दें तो मौजूदा शिक्षा सत्र में किसी विद्यालय में टीचरों की संख्या दहाई का आंकड़ा पार करती हुई नहीं दिखाई दे रही है। वहीं राज्य सरकार की ढिलाई के चलते जिले के छह राजकीय विद्यालय एकल टीचर पद्धति पर ही संचालित हैं। दिबियापुर और सहार के विद्यालयों को छोड़ दें तो शेष 13 विद्यालयों में कुल 123 टीचरों के सृजित पदों के सापेक्ष नवीन शिक्षा सत्र में मात्र 31 टीचरों पर राजकीय विद्यालय की शिक्षा टिकी है। इनमें सर्वाधिक छह टीचर राजकीय बालिका विद्यालय बिधूना में कार्यरत हैं।

राजकीय विद्यालयों में तैनात टीचर
विद्यालय        सृजित पद         कार्यरत       
अयाना                   16            04
नसीराबाद               07            04
मानपुर                   07            01
जुआ                   07             04
तुर्कीपुर                   07            02
बिझाई                   07            02
लखनौ                   07            01
भटौली                   07            01
भैसोल                   07            01
करमूपुर                   07            01
पाता                      07            01
एरवाकटरा               16            03
बिधूना                   21            06
योग                     123            31

रोक हटे तो, मिले टीचर
औरैया। शिक्षा सत्र 2015-16 में खोले गए सात राजकीय उच्तर माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्ति किए टीचरों को फर्जी अभिलेख मामले में बाहर कर दिए जाने से राजकीय विद्यालयों की स्थिति बिगड़ी है। वहीं माध्यमिक विद्यालयों में टीचर नियुक्त पर लगी रोक ने राजकीय विद्यालयों के टीचरों के कोरम पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। नियुक्ति पर रोक हटे तो ही बात बनने की उम्मीद है।
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राजकीय विद्यालयों में कार्यरत टीचरों की संख्या चिंताजनक हैं। इसका शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सीमित संसाधनों पर काम करना मजबूरी है।
चंद्र प्रताप सिंह, डीआईओएस
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