अटसू(औरैया)। हौसला और हिम्मत हो तो किसी भी मुकाम को आसानी से हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कर दिखाया अजीतमल तहसील क्षेत्र के मुहारी गांव की शोभा ने। पति के टूट चुके धंधे और घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर शोभा एक समूह से जुड़ी। समूह से आर्थिक सहयोग लेकर अपने दम पर रोजगार खड़ा किया। आज 11 महिलाओं को जोड़ कर स्वावलंबी और स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर मिसाल बनी हुई हैं।
शोभा बताती हैं कि पति कमलेश मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते थे। घर की माली हालत ठीक न होने और बाजार में मांग कम होने पर धंधा टूट गया था। हालात यह थे कि वह कच्चे मकान में परिवार के साथ गुजर बसर कर रही थीं। वर्ष 2018 में उन्हें ब्लाक से समूह संचालित किए जाने की जानकारी मिली। किसी तरह हिम्मत जुटाई और ब्लाक जाकर अधिकारियों से समूह संचालन की जानकारी ली। इसके बाद गांव की मीना देवी व शांती देवी के साथ जय बजरंगबली स्वयं सहायता समूह बनाया।
जिसमें उन्हें सचिव की जिम्मेदारी दी गई। समूह में शोभा के जुड़ने के बाद 11 और महिलाएं जुड़ीं। सभी ने अपनी बचत से रुपये जमा करना शुरू किया। सभी की सहमति पर शोभा ने समूह से 40 हजार रुपये लिए और पति के टूट चुके धंधे को बढ़ाने की ठान ली। आज शोभा अपने घर पर पति व बच्चों के साथ मिट्टी के नई डिजाइन के बर्तन, मटके, सुराही, दीपक, गुल्लक बना रही हैं। उनके बनाए बर्तन इटावा, कन्नौज औरैया जिले में बिक रहे हैं। आर्डर मिलने पर भी वह कई डिजाइनदार मिट्टी के बर्तन बना रही हैं। इसमें उन्हें महीने में 10 से 15 हजार की बचत हो जाती है।
आठवीं पास पर हौसला कमजोर नहीं
शोभा ने बताया कि वह आठवीं पास हैं, लेकिन कभी अपना हौसला कमजोर नहीं होने नहीं दिया। समूह से जुड़ कर आज वह तमाम महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई के साथ गृह उद्योग संचालित करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। समूह से जुड़ी तमाम महिलाओं ने अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए अपने हुनर का इस्तेमाल कर रही हैं।
ब्लाक में समूह की होती सराहना
ब्लाक कोआर्डिनेटर अजय कुमार ने बताया कि शोभा का समूह ब्लाक के अन्य समूहों के लिए मिसाल बना हुआ है। शोभा ने कड़ी मेहनत और लगन से समूह में महिलाओं को जोड़ कर आगे बढ़ाया है। इस समूह से जुड़ी महिलाएं आर्थिक मदद लेकर अपने को स्वावलंबी बना रही है। इसका श्रेय शोभा को जाता है।
मिट्टी के बर्तन पर रंग करतीं शोभा। संवाद- फोटो : AURAIYA