एरवाकटरा। जिम्मेदारों की अनदेखी बेजुबानों पर भारी पड़ रही है। सर्दी शुरू होने के बावजूद देखभाल नहीं होने और चारा में कमी से मवेशी तड़प कर मर रहे हैं। ऐसा ही मामला एरवाकटरा ब्लॉक की उमरैन गोशाला में सामने आया है। यहां सात गोवंश मरे मिले। इनमें से कुछ को कुत्ते नोचते दिखे। कुछ कंकाल की हालत में पड़े मिले।
मंगलवार को उमरैन गोशाला में मवेशियों के मरने की सूचना ग्रामीण किसान छुन्नू , सुभाष, शिवम कुमार, अन्नू पाल, अनिल कुमार, अवधेश कुमार, प्रेमचंद्र ने जिम्मेदारों को दी। ग्रामीणों ने बताया कि जगह-जगह गोवंश मरे पड़े मिले। एक गाेवंश वहां टिन शेड में ही मरा पड़ा मिला। उसे भी कुत्ते नोच रहे थे। गोशाला के सामने खड़े बबूल के पेड़ के नीचे अलग-अलग दूरी पर छह गोवंश मरे पड़े मिले। उनमें एक गोवंश का सिर्फ कंकाल ही बचा था, जबकि अन्य पांच मृत गोवंशों का मांस कुत्ते नोच कर खा रहे थे।
सूचना मिलने पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप कुमार मौके पर पहुंचे । प्रधान की मदद से जेसीबी मंगवाकर गोवंशों के शवों और कंकालों को वहां पर गड्ढा कर दफना दिया गया। शव का पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया। गोवंशों की मौत कैसे हुई, इस बारे में कोई कुछ नहीं बता रहा है।
एरवाकटरा के बीडीओ रमेश सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। बताया कि गोशाला की जांच कराकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
कागज में 66, मौके पर मिले 54 गोवंश
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि उमरैन गोशाला में 66 गोवंश पंजीकृत हैं। ऐसे में मौके पर 12 गोवंश कम मिले। उनमें से सात का शव मिला। फिर भी पांच गाेवंश मौके पर नहीं मिले। उक्त ग्रामीणों के मुताबिक यह पांच भी अलग-अलग समय पर मर गए होंगे। मामला बाहर न आए, इसलिए इन्हें दफना दिया गया होगा।
केयर टेकर नहीं दे सका जवाब
गोशाला की देखरेख करने वाला केयर टेकर विदेश बाथम इस पूरे मामले से बचता दिखा। ग्राम प्रधान प्रदीप शाक्य भी जिम्मेदारी से कन्नी काटते दिखे। सूचना पर पहुंचे जरूर, लेकिन एक मिनट बाद ही वह वापस चले गए। शव दफनाने के लिए जेसीबी भेज दी, लेकिन खुद नहीं आए और न ही इस बारे में कोई जानकारी दी।
हाईकोर्ट गया था, वापस लौट रहा हूं। इस तरह के मामले की जानकारी नहीं हुई है। यदि ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही दोषियों पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। निखिल राजपूत, एसडीएम, बिधूना
अमर उजाला में 23 नवंबर को छपी थी बदहाली की हकीकत
औरैया। एरवाकटरा के उमरैन गोशाला में गोवंशों की मौत कोई पहला मामला नहीं है। अभी तीन दिन पहले ही 23 नवंबर को अमर उजाला में गोवंशों की बदहाली से जुड़ी हकीकत को उजागर किया था। जिसमें गोशाला के अलावा गोद दिए गए गोवंशों की मौत से जुड़ा आंकड़ा दिखाकर योजना की हकीकत से पर्दा उठाया गया था। पिछले पांच वर्ष में गोशाला में 2360 गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोद दिए गए 1875 गोवंशों में आधे से ज्यादा 945 गोवंश की मौत हो चुकी है।