बिधूना। कस्बा और आसपास के स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए लगे तिपहिया वाहन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
उन्हें ठूंसकर लाया और ले जाया जा रहा है। ऑटो व ई-रिक्शों में न जाली लगी न ही गति क्षमता पर नियंत्रण है। मानक से अधिक बच्चों को बैठाकर सड़कों पर फरार्ट भरते देखे जा रहे हैं। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। स्कूल प्रबंधन के साथ ही अभिभावक भी इसमें लापरवाही दिखा रहे हैं।
कस्बा में इंग्लिश व हिंदी माध्यम के 15 से अधिक स्कूलों का संचालन हो रहा है। ऐसे में स्कूल प्रबंधकों के पास वाहन उपलब्ध न होने पर अभिभावकों को ही अपने संसाधन से स्कूल भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभिवावक भी पैसों के लालच में अपने लाडलों को मानकविहीन ई-रिक्शों से स्कूल भेजते हैं। ऐसे ई-रिक्शे, जिसमें न तो बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगी है न ही ई-रिक्शा चालकों की गति क्षमता पर प्रतिबंध है।
क्षमता से अधिक बच्चे, ड्राइवर भी प्रशिक्षित नहीं
कस्बे में संचालित स्कूलों के वाहन सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। ई-रिक्शा व ऑटो-रिक्शा और अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की जिंदगी कैसे सुरक्षित रह सकती है, यह एक बड़ा सवाल है। इन सबके बावजूद बच्चों को रोजाना ऐसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए प्रशासन के इंतजाम भी फीके हैं। बच्चों को स्कूल ले जाने वाले इन ई-रिक्शा, ऑटो-रिक्शा व वैन आदि वाहनों में प्रशिक्षित चालक होने चाहिए, लेकिन ऐसा नजर नहीं आता।
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क्षमता से अधिक बच्चे, वाहन पर स्कूल का नाम न नंबर
कस्बे में कई स्कूलों के वाहनों में बच्चे तो होते हैं, लेकिन वह किस स्कूल के हैं इसका जिक्र वाहनों पर नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वाहन पर स्कूल का नाम और फोन नंबर जरूर होना चाहिए। इसके अलावा कई प्राइवेट स्कूलों के वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर ले जाया जाता है। अभिभावक भी यह सब कुछ देखकर मौन हैं, क्योंकि स्कूल वाहन चालक को मना किया तो उनके बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे, यह सोचकर वह भी चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन कभी हादसा हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। यदि स्कूल वाहन पर नाम नंबर लिखा हो तो कोई हादसा होने पर कम से कम स्कूल में फोन कर सूचित तो किया जा सकता है। इसके अलावा वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।
पूरे मामले में यातायात प्रभारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि अधिक बच्चों को बैठाकर चलने वाले ई-रिक्शा व ऑटो-रिक्शा के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। स्कूलों के प्रबंधकों के साथ जल्द बैठकर मानकों के बारे में बताया जाएगा। बिना मानक के सड़कों पर अगर बच्चों के वाहन मिले तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।