फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Auraiya News: बादल छटने पर दिखे जमीन के जख्म

विज्ञापन
विज्ञापन
औरैया। तीन दिन से जारी चक्रवाती बारिश रविवार को थम गई। सुबह कुछ देर तेज हवा के साथ हल्की फुहार गिरी, लेकिन 11 बजे के बाद मौसम साफ हो गया। मौसम साफ होने पर लोगों ने घरों से बाहर निकलकर चारों ओर नुकसान का नजारा देखा। जगह-जगह जलभराव था और खेतों में फसलें तबाह हो चुकी थीं। उफनाई सेंगर और अहनैया नदी के किनारे के खेत भी पानी में डूबे रहे। 10 से अधिक स्थानों पर पुराने मकानों में दरारें आ गईं। सरकारी अमले ने भवन और खेतों में हुए नुकसान का आकलन शुरू किया। दो दिन में बारिश का आंकड़ा 126 मिलीमीटर तक पहुंच गया था। अधिकारी इसे लेकर सर्वे और मुआवजे की बात कहते रहे।
विज्ञापन

बारिश में डूबीं फसलों का पानी किसानों ने पंपसेट से निकाला। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर किसानों ने अपनी फसलों में जरूरी दवाओं का छिड़काव किया। यह छिड़काव बारिश से हुए नुकसान को कम करने के लिए किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य फसलों को बचाना था।
तीन दिनों की लगातार बारिश से नमी की चपेट में आए जर्जर मकानों के दरकने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 10 से अधिक कच्चे मकान और उनकी दीवारें भरभराकर गिर गईं।
विज्ञापन

इन हादसों के दौरान कई परिवार सुरक्षित बच गए। लेकिन मलबे में अनाज, कपड़े और गृहस्थी का सारा सामान दबकर नष्ट हो गया। अचानक बेघर हुए इन पीड़ितों के सामने अब रहने का संकट है। साथ ही खाने-पीने की भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। बिधूना ब्लॉक के भटौली गांव में शनिवार रात रामशरन राठौर के मकान की पिछली दीवार गिरी। इससे मलबे में गेहूं की बोरियां, आटा और अन्य घरेलू सामान दब गया। बेला थाना क्षेत्र के हरदू, सूनीखेड़ा, नौसारा, गैली, बेला और मल्होसी गांवों में करीब आधा दर्जन कच्चे मकान ढह गए। गनीमत रही कि हादसे के समय लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
सहार और भाग्यनगर ब्लॉक के नौगवां, ढीकियापुर, जमौली तथा दासा का पुरवा में भी कई मकान दरके। मुरादगंज क्षेत्र के चंदनापुर दयालसिंह गांव में अरविंद, सतेंद्र, कल्लू, नरोत्तम और पुष्पेंद्र के कच्चे मकान गिर गए। इन मकानों के गिरने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। फफूंद के कटरा मनेपुर में मजदूर बशीर अहमद का कच्चा घर भी ढह गया।
पीड़ितों का कहना है कि वे लंबे समय से जर्जर मकानों में रहने को मजबूर थे। उन्होंने कई बार आवास योजना के लिए आवेदन भी किया था। लेकिन उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। मामले की जानकारी मिलते ही लेखपालों ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया है।
अछल्दा में लगातार बारिश के कारण सेंगर और अहनैया नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं और उनकी फसलें डूबने लगी हैं।
ब्लॉक के महेवा मार्ग से चिमकुनी गांव के पास सेंगर नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे के खेतों में खड़ी धान और बाजरा की फसलें जलमग्न हो रही हैं। सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबने से किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही है। ग्रामीणों ने बताया कि चार सितंबर को जलस्तर घटने से किसानों ने राहत ली थी। हालांकि, दो दिन की लगातार बारिश से जलस्तर दोबारा बढ़ने से फसलें फिर से डूब गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
नदी के किनारे बना शवदाह गृह भी पानी की चपेट में आ रहा है, जिससे अंतिम संस्कार में दिक्कत होगी। इसके अलावा, नदी के बगल में बने मंदिर के आसपास की जमीन और मेला मैदान भी धीरे-धीरे जलमग्न हो रहा है। लेखपाल विकास बाबू ने मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच की। निगरानी कर रहे नवीन कुमार ने बताया कि सेंगर नदी में अभी 136.43 सेमी पानी चल रहा है। नेविलगंज स्थित अहनैया नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है।
वर्जन
तहसील प्रशासन को सर्वे रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। फसल नुकसान और भवन गिरने की सूचना पर लेखपाल मौके पर जा रहे हैं। ब्लॉक व तहसील प्रशासन के सहयोग से पात्र परिवारों को राहत सामग्री, मुआवजा और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। -कमल सिंह, एसडीएम बिधूना
पकी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ऐसे में खेत में जलनिकासी दुरुस्त कर लें। जरूरत के अनुसार नमी को दूर करने के लिए दवाओं का छिड़काव भी कर सकते हैं। धान की जलनिकासी जरूर करें, नहीं तो उपज का रंग काला पड़ जाएगा। -दुर्गेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें