जीवन का सच्चा सुख सत्संग से प्राप्त होता है। सत्संग और ईश्वर ध्यान के बिना मानव को मोक्ष नहीं मिल सकता है। भौतिक साधन क्षणिक सुख दे सकते हैं, लेकिन सच्चा सुख सत्संग से मिलता है। यह बात सेंगनपुट्ठा के हनुमान टेकरी में चल रही श्रीमद भागवत कथा में पंडित पवन कृष्ण ने कही।
मंगलवार को कथावाचक पंडित पवन कृष्ण ने कहा कि सत्संग के बिना ज्ञान का जन्म नहीं हो सकता है। मनुष्य के मन को शांति नहीं मिल सकती है। सच्चे ज्ञान और शांति के लिए सत्संग और ईश्वर का ध्यान जरूरी है। बिना ईश्वर ध्यान से मनुष्य का मन भटकाव की स्थिति में रहता है, उसके चंचल मन को कहीं चैन नहीं मिलता है।
कहा कि थक हारकर वह फिर से भौतिक साधनों में डूबकर शांति खोजने का प्रयास करता है। यह क्रिया तब तक उसे परेशान करती है, जब तक वह प्रभु का स्मरण नहीं करता। प्रभु के स्मरण मात्र से उसके भकटते मन में ठहराव आने लगता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों का नामकरण जीवन में विशेष महत्व रखता है। कहा कि जब अजामिल जैसा राक्षसी प्रवृत्ति का व्यक्ति अपने पुत्र का नाम नारायण रखकर मोक्ष पा गया था। इसलिए माता-पिता अपने पुत्रों का नामकरण कराकर ही रखती है, जिससे उनका पुत्र उन्नति के रास्ते तय कर सके।
कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।