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सतेंद्र ने शव तलाशने में दिखाया था दम

Mon, 06 Jun 2016 11:28 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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अपने साथियों के साथ गोताखोर सतेंद्र - फोटो : amar ujala beuro
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जनपद के मढ़ापुर गांव का जांाबाज गोताखोर सत्येंद्र जो जान की बाजी लगाकर भी लोगों की मदद करने को तैयार रहता है। रविवार शाम को हुई घटना में भी सतेंद्र ने उस समय दम-खम दिखाकर डूबे लोगों के शव निकाले थे, जब पुलिस प्रशासन अक्षम साबित हो रहा था।
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रविवार को ही पांच लोगों के एक साथ यमुना में डूबने से मौत हो गई। काफी समय बीतने पर भी युवकों का कुछ पता नही चल पाया। ऐसे में सूचना पाकर मढ़ापुर निवासी सत्येंद्र अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गया। नदी से तीन शवों को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। सतेंद्र ने जब तीन शव निकाल दिए तब प्रशासन ने राहत की सांस ली। सभी लोग सतेंद्र के जाबाजी की तारीफ कर रहे थे। मढ़ापुर का सत्येंद्र पिछले दस सालों से निस्वार्थ भाव से इसी कार्य में लगा है। ग्रामीण बताते हैं कि 15 वर्ष की उम्र से किसान होम सिंह का बेटा सत्येंद्र डूबे युवकों को बचा रहा है। अब तक वह 15 से अधिक लोगों की जान बचा चुका है।

किन-किन घटनाओं में लिया सहारा
औरैया। दो वर्ष पूर्व नीलकंठ पुर्वा में पुलिस मुठभेड़ के दौरान एक युवक पुलिस के भय से तालाब में कूद गया था। जिस कारण उसकी मौत हो गई। पुलिस के भय से तालाब में कूदने से युवक की मौत होने से ग्रामीणों का आक्रोश पुलिस को झेलना पड़ा था। वहीं काफी मशक्कत के बाद भी युवक के न मिलने पर सत्येंद्र का ही सहारा लिया गया था। वहीं तीन वर्ष पूर्व यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन करने आए दो सगे भाईयों के  शव भी निकाले थे।
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शौक ने बनाया बेहतर गोताखोर
औरैया। सत्येंद्र बताते हैं कि बचपन से ही नदी में नहाने के दौरान दोस्तों से नदी में फेंके गए साबुन को बाहर निकालने की शर्त से आज वह 40 फुट गहरे पानी से भी कोई भी वस्तु ढूंढ लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि अपने इस कौशल से वह पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि समय रहते पता चल जाए तो वह डूबे व्यक्ति को सकुशल निकालने का पूरा प्रयास करते है।

सिस्टम से है खफा
औरैया। गृह जनपद समेत आसपास के कई इलाकों में पुलिस प्रशासन की मदद के बावजूद स्नातक सत्येंद्र रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहा है। उसने बताया कि कई बार अधिकारियों ने उनके हुनर को देखते हुए नौकरी का आश्वासन दिया पर मिली आज तक नही।
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